जब नादिया 19 साल की थी तो ISIS के लड़ाकों ने उनके सामने ही उनके परिवार वालों को मौत के घाट उतार दिया और नादिया को उठा कर ले गए। वहां उसे बहुत दर्द और यातनाओं से गुजरना पड़ा।
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उनका तब तक रेप किया जाता था जब तक वो बेहोश नहीं हो जाती है। बड़ी मुश्किल से नादिया उनके चंगुल से बचने में सफल हुई। अब नादिया मुराद को ह्यूमन ट्रैफिकिंग के लिए यूनाइटेड नेशंस की गुडविल एंबेसडर चुना गया है।
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अपनी स्थिति के बारे में नादिया ने बताया कि उन्हें जबरन उठाकर ले जाने के बाद आईआईएस के लड़ाके उन्हें पीटते थे और कई बार उनका रेप करते थे। जब उन्होंने भागने की कोशिश की तो लड़ाकों ने उन पर और अत्याचार करना शुरू किया। जब तक वो बेहोश न हो जाएं तब तक उनका रेप किया जाता था। वो बताती हैं कि रेप से पहले सारी सेक्स स्लेव्स से प्रार्थना भी करवाई जाती थी।
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करीब 3 महीने के बाद वो लड़ाकों के चंगुल से भागने में सफल हुईं। भागकर वो जर्मनी के एक मेंटल हॉस्पिटल पहुंच गईं जहां उनका इलाज किया गया।
ब्रांड एंबेसडर बनने के बाद नादिया का कहना है कि वो नरसंहार, अत्याचार और ह्यूमन ट्रैफिकिंग से जूझ रही महिलाओं और बच्चों की मदद के लिए समर्पित हैं। वह उन्हें ठीक करने और उनके जीवन और समाज को नए सिरे से बनाने में मदद करेंगी।