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Starlink Satellite Internet: जल्द मिलेगा हाई-स्पीड इंटरनेट, पलक झपकते ही डाउनलोड होंगी फिल्में, ये है एलन मस्क का प्लान

Tue, 07 Sep 2021 07:47 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Starlink Satellite Internet: दुनिया के तीसरे सबसे अमीर शख्स एलन मस्क ने भारत में जल्द हाई स्पीड इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत करने की बात कही है।  भारत में स्टारलिंक इंटरनेट सर्विस की जल्द लॉन्चिंग के संकेत खुद एलन मस्क ने अपने ट्विटर हैंडल पर दिए हैं। 
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दुनिया के तीसरे सबसे अमीर शख्स एलन मस्क ने भारत में जल्द हाई स्पीड इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत करने की बात कही है। अमेरिकी निजी अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स और दिग्गज कार निर्माता कंपनी टेस्ला के सीईओ एलन मस्क भारत में अपनी विश्व की सबसे बेहतरीन सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवाएं शुरू करने की संभावनाएं तलाश रही हैं।
इन सेवाओं के शुरू होने के बाद देश के दूर-दराज और सीमावर्ती दुर्गम इलाकों में भी हाई स्पीड इंटरनेट की पहुंच सामान्य बात हो जाएगी। गौर करने वाले बात यह भी है कि यह इंटरनेट सेवा वर्तमान इंटरनेट सेवाओं से अधिक तेज है। कहा जाता है कि अभी जिन हाईक्वालिटी फिल्मों को डाउनलोड करने में आपको 10 से 15 मिनट का समय लगता है, वह पलक झपकते ही हो जाएंगी।
यानी हर काम में आपका महत्वपूर्ण समय भी बचेगा। भारत में स्टारलिंक इंटरनेट सर्विस की जल्द लॉन्चिंग के संकेत खुद एलन मस्क ने अपने ट्विटर हैंडल पर दिए हैं। हाल ही में एक ट्विटर यूजर ट्रोनसेट के सवाल, प्रिय एलन आप भारत में स्टारलिंक सेवाओं को कब लॉन्च कर रहे हैं ..? हम और हमारे मौजूदा ग्राहक वायरलेस इंटरनेट सेवाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं?
इसके जवाब में अरबपति युवा उद्यमी ने लिखा, बस नियामक अनुमोदन प्रक्रिया का पता लगा रहे हैं। मस्क के जवाब से साफ है कि उनकी कंपनी भारत में सैटेलाइट आधारित हाईस्पीड इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत करने को तैयार है। अगर किसी बात की देरी है तो वह है उनकी कंपनी की सेवाओं को भारतीय इंटरनेट नियामक एजेंसी से स्वीकृति आवेदन और उसकी मंजूरी मिलने की है।
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Elon Musk - फोटो : Social Media
1800 से अधिक सैटेलाइट लॉन्च किए, 42 हजार का लक्ष्य
उल्लेखनीय है कि इस परियोजना का उद्देश्य उपग्रहों के समूह के माध्यम से वैश्विक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करना है। टेक क्रंच की रिपोर्ट के अनुसार, स्पेसएक्स ने नवंबर 2019 में उपग्रह प्रक्षेपण शुरू किया और लगभग एक साल बाद चुनिंदा ग्राहकों के लिए अपना 99 डॉलर प्रति माह की लागत वाला बीटा कार्यक्रम शुरू किया।
तब से अब तक, स्पेसएक्स ने 1,800 से अधिक उपग्रहों को लॉन्च किया है और अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, चिली और पुर्तगाल समेत 14 देशों में 1,00,000 नए ग्राहकों भेजे गए टर्मिनलों के अलावा - सेवा के लिए 05 लाख से अधिक अतिरिक्त ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। कंपनी का लक्ष्य 2027 तक लगभग 42,000 स्टारलिंक उपग्रहों को कक्षा में लॉन्च करना और लाखों ग्राहकों के लिए अपने उपयोगकर्ता पूल का विस्तार करना है। 
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दूरस्थ क्षेत्रों में ज्यादा हैं बीटा ग्राहक
टेक क्रंच की रिपोर्ट बताती है कि स्टारलिंक के कई बीटा ग्राहक दूरस्थ या ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड तक पहुंच सीमित या न के बराबर है। वे सैटेलाइट आधारित हाईस्पीड इंटरनेट की कस्टमर सर्विस के लिए 499 डॉलर की अग्रिम राशि का भुगतान करते हैं। इसके बदले में उन्हें एक एक स्टार्टर किट मिलता है। इसमें एक उपयोगकर्ता टर्मिनल स्पेसएक्स Dishy McFlatface (डिशी मैकफ्लैटफेस), वाई-फाई राउटर, पावर सप्लाई, केबल और एक माउंटिंग ट्राइपॉड दिया जाता है। 
 

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सितंबर के अंत तक दुनियाभर में पहुंचेगी कवरेज, मगर लेनी होगी मंजूरी 
मस्क की कंपनी के प्रेसीडेंट ग्वेने शॉटवेल के अनुसार, स्पेसएक्स ने लगभग 1800 उपग्रहों को तैनात कर दिया है और एक बार जब वे उपग्रह अपनी परिचालन कक्षा में पहुंच जाएंगे, तो सितंबर 2021 तक स्टारलिंक इंटरनेट सेवाएं वैश्विक स्तर पर कवरेज दे सकेंगी। लेकिन इसके बावजूद सेवाएं शुरू करने के लिए हमारे पास हर देश में जाने और वहां दूरसंचार सेवाएं प्रदान करने के लिए लाइसेंस पाने का काम शेष है।
भारत में, दूरसंचार विभाग (DoT) ने स्पेसएक्स को देश में किसी भी सेवा की पेशकश करने से पहले आवश्यक लाइसेंस प्राप्त करने का निर्देश दिया था। दूरसंचार विभाग को स्पेसएक्स द्वारा भारत में स्टारलिंक उपग्रह इंटरनेट सेवा की शुरुआत करने में कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन इसे भारतीय उपभोक्ताओं को सेवा देने से पहले देश के कानूनों का पालन करने के लिए तैयारी होना होगा। उचित लाइसेंस और अन्य प्राधिकरणों की तलाश करनी चाहिए। 
 
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internet speed test india - फोटो : AMAR UJALA
भारत में अभी इंटरनेट की स्थिति 
फिलहाल, भारत में सैटेलाइट से डायरेक्ट लिंक वाला कोई वायरलेस इंटरनेट प्रदाता नहीं है। हालांकि, वायरलेस इंटरनेट के लिए वायमैक्स सर्विसेस और मोबाइल इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध है। लेकिन यह टेरेस्टेरियल नेटवर्क से जुड़ी हैं। ऐसे में जिन इलाकों में कंपनियों के टॉवर नहीं होते हैं, वहां इंटरनेट सुविधा नहीं मिल पाती है। वहीं, वायमैक्स की इंटरनेट सेवाएं भी धीमी गति की हैं।
उम्मीद जताई जा रही है कि 2022 के अंत तक भारत में स्टारलिंक सैटेलाइट हाई स्पीड इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध हो जाएंगी। हालांकि, इनकी प्री-बुकिंग शुरू हो चुकी है। स्टारलिंक की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार 99 डॉलर यानी करीब 7,200 रुपये में आप इसे बुक करवा सकते हैं। सेवाएं न मिलने पर या बंद कराने पर यह राशि पूरी तरह से वापस कर दिए जाने का वादा किया जा रहा है। 
 
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fast internet
इतनी तेज मिलेगी इंटरनेट की स्पीड
स्टारलिंक से सैटेलाइट इंटरनेट अभी बीटा टेस्टिंग मोड में है। जहां तक स्पीड की बात है, डाउनलोड 50 एमबीपीएस से 150 एमबीपीएस के बीच है। अगर बात अमेरिका की करें तो वहां अभी - 
  • स्टारलिंक सैटेलाइट ब्रॉडबैंड 97.23 एमबीपीएस डाउनलोड स्पीड दे रहा है, और 13.89 एमबीपीएस अपलोड स्पीड।
  • केबल आधारित ब्रॉडबैंड की औसत डाउनलोड स्पीड 115.22 एमबीपीएस और अपलोड स्पीड 17.18 एमबीपीएस है।
  • वहीं, अमेरिकी वायुसेना ने स्टारलिंक का इस्तेमाल कर 600 एमबीपीएस की स्पीड भी हासिल की है। 
  • हालांकि, स्पेसएक्स ने भी कहा है कि सामान्य ग्राहकों को 50 से 150 एमबीपीएस की स्पीड मिलेगी। 
     
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Internet User
ऐसा कैसे संभव होगा?
सामान्य तौर पर देखें तो बेहतर और प्रभावी संचार व्यवस्था के लिए अंतरिक्ष में सैटेलाइट लॉन्च किए जाते हैं। स्पेसएक्स ने ऐसे ही करीब 42 हजार सैटेलाइट लॉन्च करने का लक्ष्य तय किया हुआ है। अभी तक 1800 लॉन्च कर भी चुकी है। इससे पूरी दुनिया में उसके इंटरनेट नेटवर्क की पहुंच हो चुकी है। हालांकि, तेज रफ्तार इंटरनेट सेवाओं के लिए अभी और सैटेलाइट भेजने होंगे। इनकी संख्या जितनी ज्यादा होगी, उतनी तेज गति से इंटरनेट प्राप्त होगा। यह सेवाएं पूरी दुनिया में एक जगह से नियंत्रित की जा सकेंगी। जबकि वर्तमान इंटरनेट की उपलब्धता कई टु़कड़ों में क्षेत्रीय आधार पर संभव हो पा रही है। 
 

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Internet - फोटो : Lifehack
ऐसे समझिए स्टारलिंक सैटेलाइट प्रणाली को
एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक हाईस्पीड वायरलेस इंटरनेट उपलब्ध कराने के लिए सैटेलाइट लॉन्च कर रही है। यह सैटेलाइट्स पृथ्वी की लोअर ऑर्बिट (LEO) में यानी धरती की सतह से 550 से 1,200 किमी ऊपर स्थापित किए गए हैं। जबकि, सामान्य सैटेलाइट करीब 30 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किए जाते हैं। सैटेलाइट जितना दूर होगा, उतना ज्यादा एरिया कवर करेगा। लेकिन सैटेलाइट जितना पास होगा, उतनी ज्यादा स्पीड देगा। इसलिए, स्टारलिंक की ओर से स्पीड और कवरेज दोनों को बढ़ाने के लिए 42 हजार सैटेलाइट लॉन्च करने का लक्ष्य लिया है। ताकि पूरी दुनिया में स्पीड और कवरेज दोनों काफी तेज और अबाधित रहे। 
 
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Elon Musk, Jeff Bezos - फोटो : Amar Ujala Graphics
टक्कर देने की तैयारी में जुटी दूसरी कंपनियां
स्पेसएक्स के स्टारलिंक प्रोजेक्ट को भविष्य में टक्कर देने के लिए एयरबस और वनवेब के जॉइंट वेंचर वनवेब सैटेलाइट्स और एमेजॉन के जॉइंट वेंचर प्रोजेक्ट कुइपर ने भी तैयारी कर ली है। इसी क्रम में वनवेब 648 सैटेलाइट के साथ 2022 के अंत तक इंटरनेट सेवा की शुरुआत करने की योजना पर काम कर रही है। जबकि एमेजॉन करीब जुलाई 2026 के अंत तक 3,236 सैटेलाइट्स लॉन्च करने की योजना है।
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