कैंब्रिज एस्ट्रोनॉमनी इंस्टीट्यूट में भारतीय मूल के वैज्ञानिक डॉक्टर निक्कु मधुसूदन की अगुवाई वाली टीम इस ग्रह पर लगातार नजर बनाए हुए है। उनका मानना है कि इस ग्रह के वातावरण में पानी की मौजूदगी का पता चला है। इसके आधार यह कहा जा सकता है कि यहां पर मानव को बसाया जा सकता है। लेकिन इसकी सतह की स्थितियाें के बारे में जानकारी जा रही है।
पानी, हाइड्रोजन बड़ी मात्रा में मौजूद
वैज्ञानिकों का मानना है कि इसे मिनी नेपच्युन भी कहा जा सकता है कि ऐसा लगता है कि ग्रह पर हाइड्रोजन और पानी के अलावा चट्टानें और लौह अयस्क भी भारी मात्रा में मौजूद है।