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जहां दादा चौकीदार और पिता ड्राइवर हैं, उसी कोर्ट में जज बने चेतन, ऐसे हासिल की सफलता

Thu, 22 Aug 2019 04:08 PM IST
Jaya Tripathi एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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चेतन बजाड़ - फोटो : Facebook
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट सिविल जज परीक्षा का परिणाम जारी हो चुका है। इसमें देश के अलग-अलग प्रदेशों से कई उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की। इन्हीं में से एक हैं चेतन बजाड़। खास बात ये है कि चेतन के पिता मध्य प्रदेश डिस्ट्रिक्ट कोर्ट (जिला अदालत) में ड्राइवर की नौकरी करते हैं। इतना ही नहीं, उनके दादा भी उसी कोर्ट में चौकीदार के रूप में कार्यरत हैं। परीक्षा में चेतन ने कौन सी रैंक हासिल की? पढ़ें उनकी सफलता की कहानी आगे की स्लाइड्स में। 
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अपने दोस्तों के साथ चेतन बजाड़ - फोटो : Facebook
26 साल के चेतन बजाड़ ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट सिविल जज की परीक्षा में ओबीसी श्रेणी में 13वीं रैंक प्राप्त की है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट, जबलपुर की अस्थायी मेरिट लिस्ट में का नाम शीर्ष के उम्मीदवारों में शामिल है। उन्होंने परीक्षा में कुल 450 में से 257.5 अंक हासिल किए हैं। ये अंक लिखित परीक्षा और साक्षात्कार को मिलाकर जारी किए गए हैं। 
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चेतन बजाड़ (बाएं) - फोटो : Facebook
चेतन बजाड़ ने आरआरएमबी गुजराती हायर सेकेंडरी स्कूल से शुरुआती शिक्षा पूरी की है। इसके बाद उन्होंने श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ से कानून की पढ़ाई की। फिलहाल चेतन मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में वकालत कर रहे हैं। वकालत करते हुए चेतन ने सिविल जज परीक्षा की तैयारी की और सफलता हासिल की। उनकी इस सफलता पर क्या कहते हैं उनके पिता और दादा, आगे पढ़ें।

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चेतन बजाड़ (दाएं) - फोटो : Facebook
इंदौर के रहने वाले चेतन बजाड़ ने बताया कि उनके पिता का नाम गोबर्धनलाल बजाड़ है, जो डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में ड्राइवर हैं।जबकि दादा जी हरिराम बजाड़ चौकीदार के पद पर कार्यरत हैं। चेतन तीन भाई हैं। चेतन का कहना है कि 'मेरे पिता का हमेशा से सपना रहा कि उनके तीनों बेटों में से कोई एक तो जज की कुर्सी पर बैठे। यही विचार में मन में हमेशा से रहा की मुझे उनका ये सपना पूरा करना है।'

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चेतन बजाड़ - फोटो : Facebook
चेतन आगे कहते हैं कि 'हर युवा किसी न किसी को अपना आदर्श मनाता है। इस लिहाज से मेरे पिता हमेशा से मेरे आदर्श रहे हैं। इस कुर्सी पर रहते हुए मेरी यही कोशिश रहेगी कि मैं लोगों को इंसाफ दिला सकूं।' लॉ में स्नातक पूरा करने के बाद ही चेतन सिविल जज की तैयारी में लग गए थे। अपने आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने चौथे प्रयास में इस परीक्षा में सफलता हासिल की।

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