मनोज कुमार
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किरदारों में ढलता ज्ञान, फिल्मों में झलकता देशप्रेम
मनोज कुमार को पद्म श्री, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। लेकिन इन पुरस्कारों से कहीं बढ़कर उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी, लोगों के दिलों में ‘भारत कुमार’ के रूप में जगह बना लेना।
उनकी शिक्षा ने उन्हें केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि सोचने, गढ़ने और प्रेरित करने वाला व्यक्तित्व बनाया। वह अभिनेता जिसने सिखाया कि किताबों में पढ़ी बातें कैसे कैमरे पर उतारी जाती हैं और कैसे राष्ट्रप्रेम को फिल्म की स्क्रिप्ट में ढाला जाता है।
उनकी फिल्म ‘शहीद’ से लेकर ‘उपकार’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ तक, हर एक किरदार में उनकी शिक्षा, सोच और राष्ट्र के प्रति भाव वाजेह तौर पर दिखाई देता है।