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इतिहास के पन्नों से : जानिए कौन था कोलंबस? जिसके असली जन्म स्थान को लेकर आज भी है विवाद

Thu, 20 May 2021 07:37 AM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

कई दस्तावेजों में जिक्र मिलता है कि क्रिस्टोफर कोलंबस पुर्तगाली था। कुछ कहते हैं कि वह स्पेन से था। इतना ही नहीं, कुछ इतिहासकारों का तो यह भी कहना है कि कोलंबस इटली से था। वहीं, कुछ उसे क्रोएशिया, पौलेंड तक का बताते हैं।
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क्रिस्टोफर कोलंबस - फोटो : सोशल मीडिया
स्कूल से लेकर कॉलेज और प्रतियोगी परीक्षाओं में कई बार इतिहास को लेकर कईं प्रश्न पूछ जाते हैं। ऐसा ही एक अनसुलझा प्रश्न है, कोलंबस कहां से थे? आप सभी ने कोलंबस का नाम तो सुना ही होगा, भले ही उसके बारे में ज्यादा जानते नहीं होंगे। खैर, कोई बात नहीं। यहां इस खबर में हम कोलंबस के बारे में विस्तार से बता रहे हैं।
दरअसल, मरते दम तक भारत का मार्ग खोजने का दावा करने वाले कोलबंस और उसके जन्म स्थान को लेकर एक विवाद छिड़ा हुआ है। इस विवाद से जुड़े रहस्य से अब पर्दा उठने जा रहा है। कई दस्तावेजों में जिक्र मिलता है कि क्रिस्टोफर कोलंबस पुर्तगाली था। कुछ कहते हैं कि वह स्पेन से था। इतना ही नहीं, कुछ इतिहासकारों का तो यह भी कहना है कि कोलंबस इटली से था। वहीं, कुछ उसे क्रोएशिया, पौलेंड तक का बताते हैं।
दुनियाभर के इतिहासकार इसे लेकर एकमत नहीं है। सैकड़ों साल बाद भी क्रिस्टोफर कोलंबस का जन्म स्थान स्पष्ट नहीं हो सका है। अब इसका असली उत्तर कुछ ही महीनों में सामने आने वाला है। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने उसके अवशेषों से उसका डीएनए जानने के लिए शोध शुरू कर दिया है। 
 
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क्रिस्टोफर कोलंबस - फोटो : सोशल मीडिया
इससे का भौगोलिक उत्पत्ति की पहचान भी हो सकेगी। इस संबंध में बुधवार, 19 मई, 2021 से प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसके परिणाम संभावित तौर पर अगले पांच या छह महीनों में यानी अक्तूबर तक सामने आ सकते हैं। जानकारी के अनुसार, क्रिस्टोफर कोलंबस का जन्म 1451 में हुआ था और मृत्यु 20 मई, 1506 को हुई थी। उसके पिता जुलाहे थे, इसलिए उसे बचपन से ही समुद्री यात्राओं का शौक पड़ गया था। बड़ा होने पर वह अपने पिता के कामकाज में हाथ बंटाने लगा। उस समय भारत और एशिया से सुदूर यूरोप तक खूब व्यापार होता था।
 
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क्रिस्टोफर कोलंबस से जुड़ी एक पेंटिंग - फोटो : सोशल मीडिया
कोलंबस 1492 ई. में स्पेन से सुदूर पूर्वी एशिया यानी भारत, चीन, जापान तक पहुंचने का सबसे आसान रास्ता खोजने के लिए जलमार्ग से रवाना हुआ था। परंतु वह पश्चिम दिशा में यात्रा करते हुए पश्चिमी दीप-समूह में पहुंच गया। अटलांटिक महासागर में लंबे समय तक नौकायन करने के बाद 1492 में उसने एक नई दुनिया अमेरिका की खोज की। उस समय तक दुनिया में अमेरिका की कोई खास पहचान नहीं थी। इतालवी अन्वेषक आमेरीगो वेस्पूच्ची (Amerigo Vespucci) ने अमेरिका नाम दिया था। 

 

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क्रिस्टोफर कोलंबस - फोटो : सोशल मीडिया
दरअसल, 15वीं सदी के समुद्र यात्री कोलंबस के शुरुआती जीवन के बारे में इतिहास के पन्नों में जानकारी बेहद कम है। 515 साल पहले मर चुके कोलंबस के बार में शुरुआती बड़ी सफलता 2003 में मिली थी। जब सेविले में गिरिजाघर के मकबरे में रखी हड्डियां डीएनए जांच में कोलंबस की पाई गई। लेकिन उसके बाद जांच रोक दी गई थी। स्पेन की ग्रेनाडा यूनिवर्सिटी से अनुसंधानकर्ताओं की टीम ने अपनी जांच रोकने का कारण तत्कालीन डीएनए तकनीक को प्रमाणिकता के अभाव को बताया था।
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क्रिस्टोफर कोलंबस - फोटो : सोशल मीडिया
लेकिन हाल ही के वर्षों में डीएनए जांच तकनीक काफी प्रभावी और सटीक साबित हुई है। इससे दोबारा उम्मीद जगी है कि अब यूरोपीय यात्री कोलंबस की वंशावली और जन्म क्षेत्र को जानने में वंशाणु भूगोल मदद कर सकता है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के द्वारा कोलंबस, उसके बेटे हर्नांडो और उसके भाई डिएगो की हड्डियों की जांच ग्रेनाडा विश्वविद्यालय में की जाएगी।  
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