कर्नाटक हाईकोर्ट ने हिजाब विवाद में छात्राओं की याचिका पर अपना फैसला दे दिया है। कुल 74 दिनों तक चले इस विवाद में राज्य में कई हिंसक प्रदर्शन भी हुए तो कहीं हत्या का भी आरोप लगा। इसके साथ ही राजनीतिक दल भी इस पर बयानबाजी से पीछे नहीं हटे।
कर्नाटक के स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहनकर प्रवेश के लिए शुरू हुए विवाद पर हाईकोर्ट का फैसला सामने आ गया है। हाईकोर्ट ने मंगलवार 15 मार्च, 2022 को छात्राओं की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि हिजाब धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। स्कूल यूनिफार्म को लेकर बाध्यता एक उचित प्रबंधन है। छात्र या छात्रा इसके लिए इंकार नहीं कर सकते हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि इस्लाम धर्म में हिजाब पहनना अनिवार्य नहीं है। मुख्य न्यायाधीश ऋतुराज अवस्थी, जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित और जस्टिस जेएम काजी ने इस मामले की सुनवाई की है। आइए जानते हैं कर्नाटक में 74 दिनों तक चले इस विवाद में कब-कब क्या-क्या हुआ..
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Hijab Controversy
- फोटो : Amar Ujala
1 जनवरी 2022: उडुपी से शुरू हुआ था विवाद
कर्नाटक में इस विवाद की शुरुआत जनवरी महीने में हुई थी। यहां उडुपी के सरकारी पीयू कॉलेज में हिजाब पहनीं 6 छात्राओं को कॉलेज प्रशासन ने प्रवेश की अनुमति नहीं दी थी। कॉलेज प्रशासन ने इसके पीछे ड्रेस कोड में समानता का हवाला दिया था। इसके विरोध में छात्राओं ने हाईकोर्ट का रुख किया था। इस बीच राज्य में यह विवाद बढ़ गया और विभिन्न स्थानों पर हिजाब के विरोध में छात्र भगवा शॉल में स्कूल आने लगे।
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5 फरवरी: सरकार ने लागू किया ड्रेस कोड
राज्य में हिजाब के विरोध और समर्थन में बढ़ते विवाद को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने स्कूल कॉलेजों में ड्रेस कोड को अनिवार्य कर दिया था। इस आदेश में निजी स्कूलों को अपनी पसंद का ड्रेस कोड चुनने की छूट दी गई थी।
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- फोटो : ANI
9 फरवरी: एकल बेंच ने पूरी की सुनवाई
हिजाब पहनकर कक्षाओं में प्रवेश की मांग करने वाली छात्राओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी और कॉलेज के फैसले को संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 के तहत उनके मौलिक अधिकार का हनन बताया था। मामले पर एकल पीठ ने सुनवाई करने के बाद इसे 9 फरवरी को बड़ी बेंच के पास में ट्रांसफर कर दिया था।
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10 फरवरी: बड़ी बेंच ने शुरू की सुनवाई
पूरे मामले पर कर्नाटक हाईकोर्ट की बड़ी बेंच ने सुनवाई 10 फरवरी को शुरू की थी। इस मामले में 11 दिनों तक हुई सुनवाई में सरकार के वकील और याचिकाकर्ताओं के वकील ने अपनी अपनी दलीलें कोर्ट के समक्ष रखी थी। याचिकाकर्ता के वकील ने जहां संविधान दक्षिण अफ्रिका के कोर्ट के फैसले की दलील दी तो वहीं, सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा था कि हिजाब पहनने पर रोक भेदभाव को बढ़ावा नहीं है।
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9 से 15 फरवरी: बंद रहे स्कूल कॉलेज
हिजाब के विरोध और समर्थन में प्रदर्शन को तेज होता देखकर राज्य में स्कूल-कॉलेजों को 9 से 15 फरवरी के लिए बंद करना पड़ा था। हालांकि, हाईकोर्ट की बड़ी बेंच ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से स्कूलों को खोलने और अंतिम फैसला आने तक ड्रेस कोड को फॉलो करवाने के अंतरिम आदेश दिए थे। इस दौरान धीरे-धीरे विरोध प्रदर्शन अन्य राज्यों मे भी फैल गया था।
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- फोटो : ANI
25 फरवरी: खत्म हुई सुनवाई
कर्नाटक हाईकोर्ट में पूरे मामले पर सुनवाई 25 फरवरी को पूरी हो गई थी। इसके बाद कोर्ट ने मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस दौरान राज्य में कई जगहों पर विवाद भी सामने आए थे। विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी हिजाब के समर्थन और विरोध में जमकर बयानबाजी की।
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14 मार्च- कलबुर्गी जिले में धारा 144 लागू
हाईकोर्ट के फैसले से पहले ही 14 मार्च को राज्य सरकार ने दक्षिण कन्नड़ जिले के सभी स्कूल-कॉलेजों में छुट्टी कर दी है। वहीं, कलबुर्गी जिले में सोमवार शाम 8 बजे से 19 मार्च की सुबह 6 बजे तक धारा 144 लागू कर दी गई है। इस दौरान सभी शिक्षण संस्थानों को बंद रखा जाएगा। इसके अलावा कई अन्य जिलों में भी चौकसी बरतते हुए ऐसे ही आदेश जारी किए गए हैं। उडुपी जिले में भी पहले से ही धारा 144 लागू की गई है।
15 मार्च: हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला
कर्नाटक हाईकोर्ट ने 15 मार्च, 2022 को पूरे मामले पर अपना फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश ऋतुराज अवस्थी, जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित और जस्टिस जेएम काजी की पीठ ने छात्राओं की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि हिजाब धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। स्कूल यूनिफार्म को लेकर बाध्यता एक उचित प्रबंधन है। छात्र या छात्रा इसके लिए इंकार नहीं कर सकते हैं। इसके साथ ही कर्नाटक हाईकोर्ट राज्य में कुल 74 दिनों तक चले इस विवाद की समाप्ति कर दी है। हालांकि, छात्राएं अब सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती हैं।