सांकेतिक तस्वीर
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विपरीत हालातों में डटे रहें
लचीलापन सिर्फ एक व्यक्तिगत गुण नहीं है, बल्कि यह अनुभवों, परिवेश और दृष्टिकोण का मिश्रण है। इसमें योगदान देने वाले पहलुओं में शैक्षणिक उपलब्धियां, समस्या-समाधान कौशल और रचनात्मक सोच शामिल हैं। इनमें से कई कौशल तो आप बचपन में ही विकसित कर सकते हैं। इसके अलावा, जब आप अपने कठिन अनुभवों से सीखकर जीवन को नए दृष्टिकोण से देखेंगे, तभी नई सोच और पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ पाएंगे। ऐसा करके आप समस्याओं से डरकर पीछे हटने के बजाय डटकर उनका सामना करना सीखते हैं। इसके अलावा, पारिवारिक व सामाजिक सहयोग, सांस्कृतिक जुड़ाव तथा अच्छे रिश्ते भी आपके लचीलेपन को मजबूत करते हैं।