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Life Challenge Tips: जीवन में चुनौतियों से न हारें, लचीलापन बनाएं अपनी ताकत; हर मुश्किल को अवसर में बदलें

Wed, 27 Aug 2025 10:24 AM IST
शिवम गर्ग पीटर मैकएवॉय, प्रोफेसर, कर्टिन यूनिवर्सिटी

सार

Resilience Skills: जीवन उतार-चढ़ाव और कठिनाइयों से भरा है, लेकिन लचीलापन एक ऐसा कौशल है जो हर चुनौती को अवसर में बदलने की ताकत देता है। जानें कैसे लचीलापन बढ़ाएं और विपरीत परिस्थितियों में भी मजबूत बने रहें।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
Resilience in Life: जीवन उतार-चढ़ाव, नित नए बदलावों और अनिश्चितताओं से भरी एक यात्रा है, जहां हर मोड़ पर नई चुनौतियां आपका इंतजार करती हैं। कभी परिस्थितियां अनुकूल होती हैं, तो कभी अचानक ऐसे हालात सामने आते हैं, जिनकी आपने कल्पना भी नहीं की होती।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock (AI)
ऐसे में, सवाल यह नहीं है कि कठिनाइयां आएंगी या नहीं, बल्कि यह है कि उनका सामना कैसे किया जाए। जिंदगी का यही सफर आपको सिखाता है कि मुश्किल हालातों में हार मान लेना समाधान नहीं है, बल्कि चुनौतियों को अवसर में बदलना ही असली कला है। इस कला का नाम है लचीलापन। यह केवल कठिनाइयों से उबरने की क्षमता नहीं है, बल्कि मानसिक, भावनात्मक और व्यावहारिक शक्ति का वह संतुलन है, जो आपको टूटने नहीं देता और हर बार पहले से अधिक मजबूत बनाता है। आइए जानते हैं कि कठिन परिस्थितियों में मजबूत बने रहने के उपाय क्या हैं और कौन-से कारक लचीलेपन को बढ़ावा देते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

संतुलन की अहमियत

लचीलेपन का अर्थ यह नहीं है कि जीवन में तनाव न हो, बल्कि सीमित स्तर का तनाव आपको मजबूत बनाता है। हालांकि, दोनों में संतुलन होना भी उतना ही जरूरी है। तनाव और चुनौतियों का सामना करते वक्त ही आप नए कौशल सीखते हैं या पहले से मौजूद हुनर को निखारते हैं। जब आप थकावट, उदासी या खुद को कमजोर महसूस करते हैं, तब लचीलापन ही आपको फिर से सक्रिय होने में मदद करता है। यह आपके ध्यान और प्रेरणा को जगाता है। इसमें व्यायाम, योग, गहरी सांस लेना और सुकून देने वाला संगीत सुनना बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

विपरीत हालातों में डटे रहें

लचीलापन सिर्फ एक व्यक्तिगत गुण नहीं है, बल्कि यह अनुभवों, परिवेश और दृष्टिकोण का मिश्रण है। इसमें योगदान देने वाले पहलुओं में शैक्षणिक उपलब्धियां, समस्या-समाधान कौशल और रचनात्मक सोच शामिल हैं। इनमें से कई कौशल तो आप बचपन में ही विकसित कर सकते हैं। इसके अलावा, जब आप अपने कठिन अनुभवों से सीखकर जीवन को नए दृष्टिकोण से देखेंगे, तभी नई सोच और पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ पाएंगे। ऐसा करके आप समस्याओं से डरकर पीछे हटने के बजाय डटकर उनका सामना करना सीखते हैं। इसके अलावा, पारिवारिक व सामाजिक सहयोग, सांस्कृतिक जुड़ाव तथा अच्छे रिश्ते भी आपके लचीलेपन को मजबूत करते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik

सफल लोगों से सीखें

लचीलापन जन्मजात नहीं होता है। यह एक ऐसा कौशल है, जिसे सीखा और निखारा जा सकता है। सफल लोगों की कहानियों से प्रेरणा लेकर आप समझ सकते हैं कि संकट की घड़ी को अवसर में कैसे बदला जाए। चुनौतियों का रचनात्मक समाधान तलाश करके, असफलताओं को स्वीकारते हुए उनसे सीख लेकर, अपने जीवन में कुछ सीमाएं निर्धारित करके और अपने आचरण को अपने मूल्यों के अनुरूप ढालकर आप खुद में लचीलेपन के गुण का विकास कर सकते हैं। - द कन्वर्सेशन
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