बीते दो दशक में देश में इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या बेहद तेजी से बढ़ी। छात्रों के बीच इन कोर्सेज की मांग को देखते हुए हर साल सैकड़ों की संख्या में इंजीनियरिंग कॉलेज खुलने लगे। इसका परिणाम ये हुआ कि कई नए व निजी संस्थानों में पढ़ाई की गुणवत्ता से समझौता होने लगा। ये संस्थान उन मानदंडों को पूरा नहीं कर पा रहे थे जो इंजीनियरिंग कोर्सेज की पढ़ाई के लिए जरूरी हैं।