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जानिए, फुटवियर में कैसे डिजाइन करें अपना भविष्य

Mon, 04 Dec 2017 03:27 PM IST
अंशुमाला
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खूबसूरत और स्मार्ट दिखने के लिए आप अच्छे कपड़े पहनते हैं। उसमें चार-चांद लगाता है, आपका फुटवियर। पूरे व्यक्तित्व को निखारने में जितना हाथ आकर्षक परिधानों का होता है, उतना ही स्टाइलिश फुटवियर का भी होता है। आज के इस फैशन परस्त दुनिया में लोग परिधानों से लेकर फुटवियर में भी मैचिंग ढूंढते हैं। लोगों में खासकर युवा वर्ग में इन दिनों स्टाइलिश फुटवियर के प्रति दीवानगी बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि भारत में फुटवियर इंडस्ट्री में लगातार इजाफा हो रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी यहां फुटवियर प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट ट्रेड में हाथ आजमा रही हैं।

पहले जहां जूते एवं सैंडल सिर्फ चमड़े से बनते थे, वहीं आज इनका निर्माण कई तरह के कच्चे पदार्थों जैसे प्लास्टिक, जूट, रबर, कपड़ा आदि से भी किया जाने लगा है। फुटवियर को नया और आकर्षक लुक देने की विधा ही 'फुटवियर डिजाइनिंग' कहलाती है। लेदर इंडस्ट्री का अनिवार्य हिस्सा होने के नाते फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग वृहद रूप से विकसित हुआ है, जिससे फैशन की दुनिया में इसे खास पहचान भी मिली है। किस तरह के परिधानों के साथ कौन से जूते-सैंडल जंचेंगे, इसे समझकर ही एक फुटवियर डिजाइनर शूज, सैंडल्स, स्लीपर्स, बूट्स आदि डिजाइन करते हैं। 

पढ़ें: रेलवे में सीनियर एवं जूनियर टेक्निकल असिस्टेंट बनने का मौका, भर्ती इंटरव्यू के आधार पर
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शैक्षणिक योग्यता और कोर्स
करियर काउंसलर डॉ. अनुभूति सहगल का कहना है कि देश के कई संस्थान फुटवियर डिजाइनिंग में अंडर ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स करवाते हैं। यदि आप भी एक सफल फुटवियर डिजाइनर बनना चाहते हैं, तो 10+2 करने के बाद ही इसमें एंट्री ले सकते हैं। 10+2 किसी भी स्ट्रीम से किया हो। ये सभी कोर्स एक से लेकर तीन साल की अवधि तक के होते हैं।

पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा करने के लिए किसी भी स्ट्रीम से  स्नातक होना आवश्यक है। इनमें से ज्यादातर कोर्सेज में दाखिला लेने के लिए प्रवेश परीक्षा संचालित की जाती है। फुटवियर टेक्नोलॉजी कोर्सेज बी.टेक/एम.टेक प्रोग्राम के तौर पर उपलब्ध है, जिसे सिर्फ साइंस या इंजीनियरिंग के विद्यार्थी ही कर सकते हैं। 
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संभावनाओं से भरा क्षेत्र
इस क्षेत्र में रोजगार की कोई कमी नहीं है। यदि आपके अंदर रचनात्मकता, बेहतर एस्थेटिक सेंस एवं बिजनेस करने का हुनर है, तो फुटवियर डिजाइनिंग के तहत डिजाइन, मार्केटिंग और मैन्युफैक्चरिंग में नौकरी के ढेरों अवसर मौजूद हैं। देशी कंपनियों के साथ-साथ विदेशी कंपनियां भी न सिर्फ अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार कर रही हैं, बल्कि रोजगार के नए मौके भी उपलब्ध करा रही हैं।

कोर्स करने के बाद फुटवियर व स्पोर्ट्सवियर कंपनी, डिजाइनर लेबल में जूनियर एवं एगि्जक्यूटिव स्तर पर नौकरी पा सकते हैं। कार्यानुभव होने पर खुद का फुटवियर लेबल स्थापित कर सकते हैं। चाहें तो, फुटवियर टेक्नीशियन, फुटवियर लाइन बिल्डर, ट्रेड एनालिस्ट, कॉस्ट एनालिस्ट, सीनियर प्रोडक्शन कोऑरि्डनेटर या प्रोडक्शन मैनेजर के तौर पर भी काम कर सकते हैं।

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कार्य का स्वरूप 
फुटवियर इंडस्ट्री में आपको कई स्तरों पर काम करने का मौका मिलता है जैसे- डिजाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और मार्केटिंग। डिजाइनिंग में कस्टमर की पसंद को ध्यान में रखते हुए नए पैटर्न, डिजाइन एवं स्टाइल के फुटवियर डिजाइन करना होता है। सफल फुटवियर डिजाइनर बनने के लिए रचनात्मकता और मार्केट ट्रेंड के बारे में अच्छी समझ जरूरी है। मैन्युफैक्चरिंग में डिजाइन को मशीनों की सहायता से खूबसूरत आकार दी जाती है।  
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वेतन 
फुटवियर डिजाइनिंग में जॉब की संभावनाएं और स्वरूप बहुत भिन्न होती हैं, ऐसे में वेतन में भी काफी फर्क होता है। अच्छे संस्थान से कोर्स करने वाले विद्यार्थियों की सैलरी अच्छी होती है। स्वतंत्र रूप से काम करने वाले फुटवियर डिजाइनर की कमाई उनके असाइन्मेंट के नेचर पर निर्भर करता है। बिजनेस करने वाले भी सालाना अच्छा कमा लेते हैं। 15-20 हजार रुपये प्रत्येक महीने शुरुआत में कमा सकते हैं। 20-25 हजार रुपये प्रतिमाह विदेशी कंपनियां फ्रेशर्स को वेतन देती हैं।
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प्रमुख शिक्षण संस्थान
फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (एफडीडीआई), नोएडा
सेंट्रल फुटवियर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, आगरा
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली
इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नमेंट लेदर वर्किंग स्कूल, मुंबई
एवीआई स्कूल ऑफ फैशन एंड शू टेक्नोलॉजी, चंडीगढ़
कॉलेज ऑफ लेदर टेक्नोलॉजी, कोलकाता
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