नाभिकीय संलयन वह प्रक्रिया है, जिसमें भारी दबाव की वजह से परमाणु नाभिकों को आपस में जुड़ना पड़ता है और इससे बड़ी मात्रा में ऊर्जा पैदा होती है। दरअसल, सूर्य के केंद्र में भारी दबाव होता है और वहां हाइड्रोजन आपस में जुड़कर हीलियम में बदलता रहता है और और इसी प्रक्रिया में ऊर्जा पैदा होती है। चीन की ये कोशिश कई साल से जारी थी। कृत्रिम सूरज के प्रोजेक्ट की कामयाबी ने चीन को विज्ञान की दुनिया में उस मुकाम पर पहुंचा दिया है, जहां अभी तक अमेरिका, जापान जैसे तकनीकी रूप से उन्नत देश भी नहीं पहुंच पाए हैं।
क्यों खास है चीन का यह रिएक्टर...