Naushad, lata mangeshkar
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संगीत के जादूगर नौशाद की बरसी
बॉलीवुड और भारतीय संगीत जगत में नौशाद का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। पांच मई को नौशाद की पुण्यतिथि होती है। उनका निधन पांच मई, 2006 को हुआ था। संगीत से लगाव के कारण लखनऊ से घर छोड़कर भागे नौशाद शुरुआती दौर में मुंबई के फुटपाथ पर जिंदगी गुजारा करते थे। वहीं सोना-उठना, खाना-पीना और काम की तलाश करना। लेकिन उनकी किस्मत में कुछ और लिखा था। वे 40 रुपए महीने की तनख्वाह पर उस्ताद झंडे खान के साथ काम करने लगे थे।
1952 में आई बैजू बावरा फिल्म ने उनकी किस्मत बदल दी। इस सुपरहिट फिल्म का संगीत फुटपाथ पर सोने वाले युवक नौशाद ने दिया था। इसके लिए नौशाद को बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। इसके बाद उन्होंने पीछे मुडकर नहीं देखा। नौशाद ने मुगल-ए-आजम, मदर इंडिया, कोहिनूर, पाकीजा, गंगा-जमुना, बाबुल, मेरे महबूब जैसी शानदार फिल्मों में भी संगीत दिया। इस योगदान के लिए 1981 में नौशाद अली को दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड से नवाजा गया था।