यूक्रेन में फंसे छात्र।
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उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले तक जब देश में अच्छी रैंक नहीं आती थी और डॉक्टर ही बनने का सपना होता था तो छात्र रूस, यूक्रेन, चीन, कजाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों के मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेते थे लेकिन वहां से एमबीबीएस करने के बाद जब ये भारत आकर लाइसेंस लेने से पहले राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा देते तो करीब 80 फीसदी फेल हो जाते थे। हालांकि अब विदेश जाने से पहले नीट अनिवार्य है और वापस आने के बाद नेक्सट एग्जाम भी देना जरूरी है तो ऐसे में यह उम्मीद की जाती है कि जो पढ़ने वाला छात्र है वही विदेश में जाकर पढ़ाई कर पाए।