निर्भया के दोषियों को फांसी दिए हुए आज एक साल हो गए। 20 मार्च 2020 को निर्भया के छह दोषियों में से चार को दिल्ली के तिहाड़ जेल में फांसी पर लटका दिया गया था। बस ड्राइवर राम सिंह ने पहले ही जेल में खुदकुशी कर ली थी। नौ साल पहले जिस मनहूस रात में यह गैंगरेप हुआ था, उस समय छह आरोपियों में से एक नाबालिग भी था। क्या आप जानते हैं इस छठे गुनहगार के बारे में? कैसे बीता रहे जिंदगी? जानने के लिए पढ़िए पूरी खबर।
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nirbhaya case
- फोटो : अमर उजाला
मालूम हो कि घटना के समय नाबालिग सामूहिक दुष्कर्म में शामिल पांचवां व्यक्ति था। खबरों के अनुसार निर्भया के साथ सबसे अधिक क्रूरता इसी नाबालिग ने की थी। एनजीओ अधिकारी के अनुसार उस नाबालिग रहा आरोपी बस ड्राइवर राम सिंह के लिए काम करता था। उसके राम सिंह के यहां 8 हजार रुपये बकाया थे और वह लगातार राम सिंह से अपने पैसे मांग रहा था। घटना की रात वह राम सिंह के पास अपने पैसे लेने गया था और अपराध का हिस्सा हो गया था।
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Nirbhaya Tihar Jail
- फोटो : शुभम बंसल
निर्भया के दोषियों में से यही एक चेहरा है, जिसे आज तक देश ने नहीं देखा है। चौंका देने वाली बात ये है कि निर्भया के छह दोषियों में से इसे छोड़ कर सभी को फांसी की सजा मिली थी। इस मामले में दोषी नाबालिग अब 26 साल का हो गया है और आजाद है। कुछ दिन सुधार गृह में रहने के बाद दिसंबर 2016 में उसे मुक्त कर दिया गया।
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फांसी के वक्त तिहाड़ जेल के बाहर का माहौल
- फोटो : शुभम बंसल
बता दें कि निर्भया मामले में दोषी नाबालिग दक्षिण भारत में कहीं कुक का काम कर रहा है। एक एनजीओ के अधिकारी ने बताया कि वह एक नए रूप में आ चुका है और यहां तक की उसने एक नया नाम भी रख लिया है। उसने दिल्ली में प्रेक्षणगृह में खाना पकाने का काम सीखा था।
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People Protesting for Justice for Nirbhaya
- फोटो : People Protesting for Justice for Nirbhaya
अधिकारी ने कहा कि हमने उसे राष्ट्रीय राजधानी से बहुत दूर भेज दिया, जिससे कि लोग उसका पता न लगा सके और वह एक नई जिंदगी शुरू कर सके। नाम जाहिर न करने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि वह दक्षिण भारत में कहीं कुक का काम कर रहा है। उसका नियोक्ता उसके वास्तविक नाम के बारे में नहीं जानता और वह उसकी पिछली जिंदगी से भी अवगत नहीं है। अधिकारी ने कहा कि हम उसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजते रहते हैं, जिससे कि वह किसी की नजर में न आ सके।
दिल्ली से महज 240 किलोमीटर दूर एक गांव में रहने वाला यह नाबालिग महज 11 साल की उम्र में अपना घर छोड़ भाग आया था। घर से भागकर दिल्ली आते ही सबसे पहले उसकी मुलाकात राम सिंह से हुई जो निर्भया कांड का आरोपी था जिसने तिहाड़ में आत्महत्या कर ली थी। रामसिंह ने ही उसे बस की सफाई के काम पर रख लिया और यहीं से उसकी नौकरी शुरू हो गई। बता दें जिस बस की सफाई का काम उसे दिया गया उसी में 16 दिसंबर 2012 की रात निर्भया के साथ गैंगरेप को अंजाम दिया गया, जिसमें यह नाबालिग भी शामिल था।