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डरावनी यादें: दूसरी लहर के दो माह पहली के 10 माह पर भारी, 30% अधिक मौतें, दैनिक मामले भी चार गुना रहे

Thu, 17 Jun 2021 08:19 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली में मार्च के आखिरी सप्ताह में दूसरी लहर शुरू हो गई थी। हर दिन संक्रमित रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रहे थे। 20 अप्रैल को संक्रमितों की जो संख्या 28,395 हो गई थी। आलम यह था कि 25 मार्च से 1 मई के बीच ही 91 हजार सक्रिय मरीज बढ़ गए थे। मौतें भी रोजाना 150 से ज्यादा हो रही थीं। संक्रमण दर 35 फीसदी तक पहुंच गई थी। 
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दिल्ली में कोरोना - फोटो : पीटीआई
दिल्ली में कोरोना की दूसरी लहर थम चुकी है। यह पहली लहर के मुकाबले काफी घातक रही। इस बाद करीब 30 फीसदी मौतें ज्यादा हुईं। दैनिक मामले भी चार गुना ज्यादा रहे। पहली लहर में जहां अधिकतम सक्रिय मरीज 40 हजार तक ही पहुंचे थे। इस बार एक लाख के करीब हो गए थे। दैनिक मामले भी चार गुना ज्यादा रहे। पहली लहर के 10 महीनों पर ही दूसरी लहर के दो माह भारी पड़े हैं। अब संभावित तीसरी लहर का खतरा बना हुआ है। 

दिल्ली में मार्च के आखिरी सप्ताह में दूसरी लहर शुरू हो गई थी। हर दिन संक्रमित रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रहे थे। 20 अप्रैल को संक्रमितों की जो संख्या 28,395 हो गई थी। आलम यह था कि 25 मार्च से 1 मई के बीच ही 91 हजार सक्रिय मरीज बढ़ गए थे। मौतें भी रोजाना 150 से ज्यादा हो रही थीं। संक्रमण दर 35 फीसदी तक पहुंच गई थी। पहली लहर में जहां 11 हजार से कम मौतें थीं तो वहीं दूसरी में करीब 14 हजार लोगों ने जान गंवाई थी। दूसरी लहर में मौत का आंकड़ा 448 तक पहुंचा था। यह सभी मानक पहली लहर के मुकाबले कई गुना अधिक थे। दूसरी लहर की इस भयानक तस्वीर के बाद अब संभावित तीसरी लहर का खतरा बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना की अगली लहर आने की पूरी संभावना है, लेकिन अगर लोगों ने कोरोना से बचाव के नियमों का पालन जारी रखा और अधिक से अधिक टीकाकरण हो गया तो इसके खतरे का काफी हद तक कम किया जा सकता है। 
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कोरोना लॉकडाउन हटने के बाद दिल्ली के बाजारों में उमड़ी भीड़ - फोटो : संजय कुमार
तीसरी लहर आने की संभावना प्रबल
सफदरजंग अस्पताल के कम्युनिटी मेडिसन विभाग के अध्यक्ष डॉ. जुगल किशोर का कहना है कि अगली लहर आने का खतरा वायरस के स्वरूप बदलने की संभावना पर टिका है। अगर वायरस के स्ट्रेन में कोई बदवाल हुआ और समय पर उसकी पहचान न हो सकी तो अगली लहर आएगी। उन्होंने कहा कि इससे बचने के दो तरीके हैं। पहला बड़े स्तर पर जीनोम जांच को बढ़ाया जाए। इससे वायरस में हुए बदवाल की सही समय पर पहचान हो सकेगी और उस स्ट्रेन वाले क्षेत्र को कंटेन करके वायरस के प्रसार को रोका जा सकेगा। डॉ. के मुताबिक, लॉकडाउन खुलने के बाद अब मास्क, दो गज की दूरी का पालन करें। सभी पात्र लोग टीका भी लगवा लें तो कोरोना की अगली लहर के खतरे को कम किया जा सकता है।

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. कृष्ण राजभर का कहना है कि अगली लहर आने की पूरी संभावना है, लेकिन अभी यह नहीं कह सकते कि इसके आने में कितना समय लगेगा, हो सकता है कि अगले दो से तीन महीने में ही आ जाए या काफी समय बाद आए। उन्होंने कहा कि कम समय में ही अधिक टीकाकरण करने से अगली लहर के खतरे को कम किया जा सकता है। 
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कोरोना वार्ड - फोटो : amar ujala
पहली लहर के आंकड़े
कुल मामले 6,47,715
ठीक हुए 6,39,164
रिकवरी दर 97
कुल संक्रमण दर 4.57
मौतें 10,704
अस्पतालों में भर्ती हुए मरीजों की अधिकतम संख्या 9,455
जांच 1,44,03,030
रिकॉर्ड दैनिक मामले 11 नवंबर को 8593
रिकॉर्ड दैनिक मौतें 18 नवंबर को 131

दूसरी लहर के आंकड़े
कुल मामले 7,83,995
ठीक हुए 7,80,123
रिकवरी दर 98.2
मौतें 13,882
अस्पतालों में भर्ती हुए मरीजों की अधिकतम संख्या 20,010
जांच 1,23,27,999
रिकॉर्ड दैनिक मामले 20 अप्रैल को 28,375
रिकॉर्ड दैनिक मौतें 3 मई को 448



 

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कोरोना वार्ड - फोटो : amar ujala
अब तक कोरोना की स्थिति
कुल मामले 14,31,868
स्वस्थ हुए 14,04,428
मौतें 24,886
रिकवरी दर 98.1
कुल संक्रमण दर 6.97
मृत्यु दर 1.74
अस्पतालों में भर्ती मरीज 1561
सक्रिय मामले 2554
कुल जांच 2,05,49,834


 
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कोरोना मरीज - फोटो : amar ujala
दिल्ली में पहली बार
कोरोना का पहला मामला 2 मार्च 2020 
13 मार्च 2020 को पहली मौत
16 मार्च को पहले मरीज ने संक्रमण से जंग जीती। 
15 अप्रैल को पहली बार कोरोना मरीज को प्लाजमा दिया गया
02 जुलाई को देश का सबसे पहला प्लाज्मा बैंक दिल्ली में बना
13 जनवरी को दिल्ली पहुंची वैक्सीन की पहली खेप 
16 जनवरी को लगा कोरोना का पहला टीका 

नोट - सभी आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक हैं और दर फीसदी में है।
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