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Delhi Pollution: दिल्ली- एनसीआर की सेहत में सुधार नहीं, लगातार 'जहरीली' हो रही है हवा

Sun, 06 Nov 2022 09:26 AM IST
Digvijay Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हर पांच में से चार परिवार इसकी चपेट में आ गए हैं। बाकी जो बचे हैं, उनमें भी लक्षण दिखने लगे हैं। नोएडा में आज सवेरे 349 AQI (बहुत खराब) श्रेणी में दर्ज किया गया।
 
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जहरीली हुई हवा - फोटो : फाइल फोटो
जहरीली हवा से दिल्ली एनसीआर की सेहत ठीक नहीं है। रविवार यानी आज पूरे दिल्ली एनसीआर में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में रही। दिल्ली में जहां AQI 339 (बहुत खराब) दर्ज किया गया। वहीं नोएडा में AQI 349 (बहुत खराब) श्रेणी में दर्ज किया गया। इसी प्रकार गुरुग्राम में भी AQI 304 (बहुत खराब) रही। यह जानकारी सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (SAFAR) ने दी है। सफर की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में हवा की गुणवत्ता और भी खराब हो सकती है। 
 
 
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जलती पराली - फोटो : फाइल फोटो
दिल्ली की जहरीली हवा अब लोगों के स्वास्थ्य पर ही नहीं बल्कि उनके रोजगार पर भी असर डालने लगी है। राजधानी के आस-पास के जिलों में जलाई जा रही पराली से दिल्ली में AQI सबसे खराब स्तर पर पहुंच गया है।आज सवेरे दिल्ली का समग्र एक्यूआई 339 दर्ज किया गया। 
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नोएडा में प्रदूषण ( फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण घातक रूप लेता जा रहा है। इस प्रदूषण की वजह से यहां सांस के मरीजों की तादात तेजी से बढ़ रही है। हर पांच में से चार परिवार इसकी चपेट में आ गए हैं। बाकी जो बचे हैं, उनमें भी लक्षण दिखने लगे हैं। नोएडा में आज सवेरे 349 AQI (बहुत खराब) श्रेणी में दर्ज किया गया।

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जहरीली हवा में सांस लेना मुश्किल - फोटो : अमर उजाला
डीजल जलने से होने वाले प्रदूषण से लंग्स कैंसर होने का खतरा रहता है। प्रौढ़ व बुजुर्ग आयु वर्ग के लोग इसमें आसानी से शिकार हो सकते हैं। ऐसा उन क्षेत्रों में ज्यादा दिखाई देता है जहां इसका एक्सपोजर ज्यादा है। कैंसर रिसर्च यूके का अध्ययन बताता है कि फेफड़ों के 10 कैंसरों में से एक कैंसर प्रदूषण से सकता है। गुरुग्राम में AQI 304 (बहुत खराब) रिकॉर्ड किया गया है। दिल्ली नोएडा के साथ ही नोएडा और गुरुग्राम की हवा भी बहुत बुरी श्रेणी में है
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दिल्ली की हवा और हुई जहरीली - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली की हवा में घुले और निगरानी केंद्रों की पकड़ में नहीं आने वाले अदृश्य प्रदूषक शरीर पर घातक वार कर रहे हैं। यह इतने महीन हैं कि शरीर की पहली छलनी (फेफड़ों) भी इनको नहीं पकड़ पाती। नतीजतन दिल से होते हुए यह खून में घुल जाते हैं। खास बात यह कि वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों से भी अभी निगरानी संभव नहीं है। इसका आकार पीएम2.5 से कम रहता है। आकलन न हो पाने से इससे बचाव के तरीकों पर खास ध्यान एजेसियों का नहीं जाता है। विशेषज्ञ इसे अदृश्य लेकिन सबसे घातक प्रदूषक मान रहे हैं।
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