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Pollution : देश की बड़ी आबादी साफ हवा में ले रही सांस, दिल्ली-एनसीआर में घुट रहा दम, राजधानी में आज का AQI 339

Sun, 06 Nov 2022 07:18 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली-एनसीआर में बढ़ा प्रदूषण का स्तर - फोटो : अमर उजाला
मौसम में बदलाव के साथ इन दिनों उत्तर-भारत में सांसों पर आफत बनी हुई है। जबकि देश के उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी भारत के कई शहरों के लोग साफ हवा में सांस ले रहे हैं। विशेषज्ञ इसके पीछे भौगोलिक, मौसमी और स्थानीय परिस्थितियों की जिम्मेदार मानते हैं। इसी का नतीजा है कि एक ही समय में देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग साफ से दमघोंटू हवा में सांस लेने में मजबूर हैं। दिल्ली-एनसीआर में एक्यूआई लगातार गिर रहा है। आज सवेरे दिल्ली का समग्र एक्यूआई 339 दर्ज किया गया जबकि नोएडा में 349, और गुरुग्राम में 304 रिकॉर्ड किया गया है। दिल्ली से साथ ही नोएडा और गुरुग्राम की हवा भी बहुत बुरी श्रेणी में है। 
 
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दिल्ली में बढ़ा प्रदूषण का स्तर - फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक, शनिवार को उत्तर-पश्चिम भारत के दो शहरों का एक्यूआई 400 से ऊपर और 21 शहरों का 300-400 के बीच दर्ज की है। मतलब यहां की हवा सामान्य तौर पर सांस लेने लायक नहीं है। वहीं दूसरी ओर 25 शहरों का एक्यूआई 50 से नीचे है। यहां की हवा एकदम से साफ अच्छी श्रेणी में है।
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दिल्ली में बढ़ा प्रदूषण का स्तर - फोटो : अमर उजाला
देश के भीतर के इस फर्क पर सीपीसीबी के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. एसके त्यागी कहते हैं कि इंडो-गैग्निटिक क्षेत्र में आने वाले राज्यों और पठारी क्षेत्र में आने वाले राज्यों की आबोंहवा में अंतर है। देश के निचले हिस्सों के कई राज्य पठारी क्षेत्र में आते हैं। ऐसे में यहां बहुत ही कम मात्रा में धूल उड़ती है। यूरोप में कुछ इसी तरह के हालात हैं, जिससे वहां के प्रदूषण में धूल मिट्टी के प्रदूषण की न के बराबर हिस्सेदारी होती है। यही वजह है कि वहां के कई शहरों का एक्यूआई पांच से 10 के बीच में रहता है।

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दिल्ली में बढ़ा प्रदूषण का स्तर - फोटो : अमर उजाला
दक्षिण में मौसम का पड़ता है प्रभाव
विशेषज्ञों के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम भारत में मौसमी दशाएं देखने को मिलती हैं। यहां सर्दी में बहुत अधिक सर्दी व गर्मी में बहुत अधिक गर्मी के साथ रिकॉर्ड टूटते हैं, जबकि पठारीय क्षेत्रों में समताप रहता है। यहां सालभर करीब-करीब एक जैसा ही मौसम बना रहता है। सर्द मौसम न होने की वजह से यहां मिक्सिंग हाइट और वेंटिलेशन इंडेक्स कम नहीं होता, जिससे प्रदूषकों को जमने में मदद नहीं मिलती है।
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समुद्र तट - फोटो : फाइल फोटो
तटीय इलाकों में पड़ता है प्रभाव
समुद्र के नजदीक बसे हुए शहरों में लैंडलॉक्ड शहरों की तुलना में हवा की गुणवत्ता बेहतर होती है। इसकी वजह है वहां हवा में मौजूद होने वाली नमी। विशेषज्ञों का कहना है कि तटीय इलाकों में होने वाला प्रदूषण समुद्र की वजह से वहां नमी भरी हवाओं में घुलकर समुद्र में जा मिलता है और शहर की हवा साफ रहती है, जबकि लैंडलॉक्ड शहरों में प्रदूषण को निकलने की जगह नहीं मिलती, जिस वजह से प्रदूषण का स्तर बढ़ता है। दिल्ली-एनसीआर की स्थिति भी कुछ इसी तरह से है।
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दिल्ली में बढ़ा प्रदूषण का स्तर - फोटो : अमर उजाला
भरी बाल्टी में बूंद भर पानी फैलाता कीचड़... यूं ही हवा गंभीर
विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रदूषण के मामले में दिल्ली की स्थिति भरी बाल्टी सरीखी है। इसमें एक बूंद भर का अतिरिक्त पानी सतह पर कीचड़ कर देता है। दिल्ली-एनसीआर में हर वक्त वाहनों का दबाव दूसरे शहरों से ज्यादा रहता है। दिल्ली के आसपास के शहरों के औद्योगिक विकास के साथ निर्माण गतिविधियां भी तेज हैं। स्वाभाविक तौर पर इनसे प्रदूषक निकलते हैं। भौगोलिक स्थिति जिनको अपने में फंसाए रखती है। इससे सर्दियों के अलावा भी हर मौसम में प्रदूषण का दबाव इस क्षेत्र पर रहता है। स्थिति कुछ-कुछ भरी बाल्टी जैसी साल भर बनी रहती है।
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दिल्ली में बढ़ा प्रदूषण का स्तर - फोटो : अमर उजाला
-दिल्ली एक लैंडलॉक्ड शहर है, यानि यह चारों दिशाओं से जमीन से घिरा हुआ है। इसके आसपास बसे शहरों में भी हवा किसी बड़े जलीय स्त्रोत से होकर नहीं गुजरती है। ऐसे में हवा अपने रास्ते में पड़ने वाले सभी प्रदूषकों को लेते हुए यहां तक पहुंचती है।

-लैंडलॉक्ड होने की वजह से चारों दिशाओं से आकर दिल्ली में प्रदूषक फंस जाते हैं।
-एनसीआर में होने वाली औद्योगिकी गतिविधियों का दिल्ली की आबोंहवा पर पड़ता है असर। सालभर वातावरण में मौजूद रहते हैं प्रदूषक।

-तापमान में होने वाले बदलाव की वजह से भी पड़ता है प्रदूषण का प्रभाव। सर्दी में तापमान कम होने के साथ मिक्सिंग हाइट तीन गुना तक कम हो जाती है। इससे प्रदूषकों को ऊपर तक पहुंचने में नहीं मिलती है मदद, जिससे घुटना लगता है दम।

-सिंधु-गंगा के मैदानी क्षेत्र में होने के कारण दिल्ली व इसके आसपास के राज्यों में रेत वाली बलुई मिट्टी मौजूद है। इससे हर समय हवा में अधिक मात्रा में प्रदूषक मौजूद रहते हैं। वहीं, राजस्थान से आने वाली हवा भी दिल्ली-एनसीआर तक धूल के कणों को लेकर पहुंचती है।

-केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के एक सर्वेक्षण के मुताबिक, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई से भी ज्यादा दिल्ली में वाहनों का दबाव है। वहीं, एनसीआर से भी बड़ी संख्या में यहां डीजल और पेट्रोल चालित पुरानी गाड़ियों का सालभर आवागमन होता रहता है। वाहनों से निकलने वाली जहरीली गैस हवा को और प्रदूषित करती है।
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दिल्ली में बढ़ा प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला
टॉप प्रदूषित शहर 50 से नीचे AQI वाले टॉप शहर
चरखी दादरी- 401   रामनथापुरम- 14
धारूहेड़ा- 408 हासन- 24
दिल्ली- 381 थोडीकुडी- 18
गाजियाबाद- 322 एजवाल- 25
ग्रेटर नोएडा- 312 सिवासागर- 31
गुरुग्राम- 357 गंगटोक- 30
नोएडा- 357 पुडुचेरी- 32
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