पिछले कुछ समय से आधार कार्ड ना सिर्फ लोगों की पहचान का जरिया बना है बल्कि बहुत सी सरकारी सेवाओं को पाने और कई सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए जरूरी हो गया है। आजकल बैंक खाते से लेकर फोन नंबर तक आधार कार्ड से लिंक करने की अनिवार्यता हो गई है। ऐसे में हर कोई इन जरूरी सेवाओं से आधार लिंक करा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा बन चुके आधार कार्ड की जानकारी बेची जा रही है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
आपको याद होगा कि केंद्र सरकार और आधार कार्ड जारी करने वाली सरकारी एजेंसी यूआईडीएआई ने दावा किया था कि आधार का डाटा पूरी तरह सुरक्षित है और इसे कोई लीक नहीं कर सकता, ना ही इसे चुराया जा सकता है। लेकिन इस एजेंसी के दावे के उलट अंग्रेजी अखबार दि ट्रिब्यून ने इस जानकारी को बेचे जाने का दावा किया है।
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व्हाट्स एप
- फोटो : SOCIAL MEDIA
अखबार दि ट्रिब्यून ने व्हॉट्सऐप पर एक गुमनाम विक्रेता से एक सेवा खरीदने के दावा किया है। यह विक्रेता देश में अब तक बने 1 अरब आधार कार्ड की जानकारी को निर्बाध रूप से मुहैया कराता है। इसके बदले यह विक्रेता सेवा खरीदने वाले से कुछ पैसे वसूल करता है।
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aadhaar link with bank
दि ट्रिब्यून के अनुसार उनके संवादाता ने आधार की जानकारी बेचने वाले रैकेट के एजेंट को पेटीएम के जरिए 500 रुपए ट्रांसफर किए। इसके बाद उसने अखबार के संवादाता के लिए एक गेटवे तैयार कर दिया। फिर एजेंट ने संवादाता को लॉगइन आईडी और पासवर्ड दिया, इसके जरिए लॉगइन करके आधार का पोर्टल देखा जा सकता है।
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aadhaar
इस तरह किसी शख्स ने आधार कार्ड बनवाते समय जो भी जानकारी यूआईडीएआई को मुहैया कराई होगी वो सब आप सिर्फ 500 रुपए देकर देख सकते हैं। इस जानकारी में आधार कार्ड बनवाने वाले का नाम, पता, पिन नंबर, फोटो, फोन नंबर और ईमेल आईडी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
दि ट्रिब्यून के संवादाता ने एजेंट को 300 रुपए और दिए। इसके बदले में उसे एक ऐसा सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराया गया जहां आप डीटेल भरकर किसी भी इंसान का आधार कार्ड निकाल सकते हैं।
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aadhaar card
इस बात की जानकारी जब यूआईडीएआई के अधिकारियों को वो भी इस बात को जानकर हैरान रह गए कि आखिर लोगों की पूरी जानकारी तक कैसे पहुंचा जा सकता है। उन्होंने इसे सुरक्षा में बड़ी चूक माना और बेंगूलुरु में यूआईडीएआई के टेक्निकल कंसलटेंट्स को इसकी सूचना दी।
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Lock Aadhaar Biometric Data
अखबार दि ट्रिब्यून की पड़ताल में ये बात सामने आई है कि आधार कार्ड के डाटा को लीक करने वाला ये रैकेट व्हॉट्सऐप पर एक गुमनाम ग्रुप द्वारा 6 महीने पहले बनाया गया था। इस ग्रुप ने कॉमन सर्विस सेंटर्स स्कीम(CSCS) के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मिनिस्ट्री द्वारा नियुक्त किए गए करीब तीन लाख विलेज-लेवल एंटरप्राइज(VLEs) ऑपरेटर्स को निशाना बनाया है। ग्रुप ने इन ऑपरेटर्स को आधार का डाटा एक्सेस करने का लालच दिया है।
दरअसल ये तीन लाख लोग जिन्हें सरकार ने हायर किया था काम वापस लिए जाने के बाद खाली हो गए हैं। अब आधार बनाने का काम बैंकों और पोस्ट ऑफिसों को दे दिया गया है। ऐसे में अब एक लाख से ज्यादा VLEs पर UIDAI के डेटा में सेंध मारने का शक है। इससे डाटा का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो सकता है।