सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह को मनी लांड्रिंग (काला धन को सफेद बनाना) मामले में जमानत दे दी है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से यादव सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। हालांकि यादव सिंह को फिलहाल जेल में ही रहना होगा क्योंकि उन भ्रष्टाचार केकई अन्य मामले भी चल रहे हैं।
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यादव सिंह की ओर से पेश वकील ने बुधवार को न्यायमूर्ति एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ केसमक्ष कहा कि गिरफ्तारी के बाद मनी लांड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा निर्धारित समय के भीतर आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया, लिहाजा वह जमानत पाने के हकदार हैं। वहीं, ईडी के वकील ने यादव सिंह की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर चार्जशीट दायर की गई थी।
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- फोटो : SELF
मालूम हो कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यादव सिंह को इस मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके खिलाफ यादव सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दायर जमानत याचिका में कहा था कि उनकी गिरफ्तारी के 60 दिनों के भीतर जांच एजेंसी आरोप पत्र दायर करने में नाकाम रही थी, लिहाजा इस आधार पर उन्हें जमानत मिलनी चाहिए।
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यादव सिंह के मुताबिक, 29 अप्रैल को गिरफ्तारी के 60 दिन पूरे हो गए थे। 30 अप्रैल को रविवार होने के कारण छुट्टी थी। एक मई को उन्होंने जमानत याचिका दायर की थी। दो मई को जांच एजेंसी ने यादव सिंह पर इस मामले में आरोपपत्र दायर किया था।
यादव सिंह ने कहा है कि तय सीमा के भीतर आरोपपत्र दायर नहीं होने के आधार पर उन्हें जमानत मिलनी चाहिए। मालूम हो कि आयकर विभाग ने नवंबर, 2014 में यादव सिंह के ठिकानों पर छापेमारी की थी और उनकी संपत्ति उनके आय के ज्ञात स्रोतों से ज्यादा पाई गई थी।