उसे पत्नी की कोई जानकारी नहीं है। उसने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर उसे तलाश करने की मांग की। हाईकोर्ट में पेश होकर महिला ने पति के पास लौटने या बच्ची को दवा पिलाने के लिए तीन माह की कस्टडी लेने से साफ इनकार कर दिया। उसने कोर्ट में कहा कि जो दवा बच्ची को दी जानी है, उससे उसे एलर्जी है। इसलिए वह दवा नहीं ले सकती। इसके बाद याचिका का निबटारा पत्नी के पक्ष में कर दिया गया।