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योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ने वाला नेता ही बना दिल्ली में बीजेपी का सबसे बड़ा स्टार

Wed, 03 May 2017 03:29 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ने वाला नेता ही अब दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के सबसे बड़ा स्टार के तौर पर उभर रहा है।
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दो साल पहले हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को जिस तरह की हार मिली थी उसे 'शर्मनाक हार' तक कहा गया। एसेंबली की 70 में से पार्टी के केवल 3 विधायक ही चुनाव जीत पाए। इसके बाद से ही भारतीय जनता पार्टी देश के दिल दिल्ली में अपनी जमीन फिर से पाने की कोशिश कर रही थी और एमसीडी चुनाव के पहले पार्टी ने एक नए चेहरे पर भरोसा किया और उसे ही पूरी जिम्मेदारी सौंप दी।भोजपुरी गायकी में अपना नाम कमा चुके मनोज तिवारी को दिल्ली बीजेपी प्रेसिडेंट बना कर पार्टी ने अपने पुराने नेताओं को भी चौंका दिया। मनोज तिवारी ने एमसीडी इलेक्‍शन से ठीक पहले एक बड़ी घोषणा करते हुए अपने निर्वतमान पार्षदों में से किसी को भी फिर से टिकट देने से मना कर दिया। तिवारी के इस फैसले को शीर्ष नेतृत्व ने पूरा समर्थन किया और एमसीडी के 272 में से 272 सीटों पर नये चेहरों के साथ चुनाव मैदान में उतर पड़ी। इसका नतीजा सबके सामने है और बीजेपी 2012 के नतीजों से भी ज्यादा सीटें जीतती दिख रह है। इसके बावजूद मनोज तिवारी का विवादों से पुराना नाता रहा है। आइए जानते हैं अचानक ही राजनीति में तेजी से उबरे मनोज तिवारी के बारे में सबकुछ...
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1- एक फरवरी 1971 में बिहार के कैमूर जिले के अतरवलिया में जन्में मनोज तिवारी के कुल छह भाई-बहन हैं। बचपन से ही गीत संगीत में रुचि रखने वाले मनोज तिवारी ने गायन को ही अपना कैरियर बनाया और भोजपुरी गायन और भक्ति गीतों की अपनी खास शैली के कारण जल्दी वो लोकप्रिय गायक बन गए।  

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2- 2003 मनोज तिवारी के कैरियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। इसी साल उनकी फिल्म 'ससुरा बड़ा पैसे वाला' रिलीज हुई जिसने सफलता और कमाई के ऐसे रिकॉर्ड बनाए कि राष्ट्रीय मीडिया सहित अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी उस पर चर्चा करने को मजबूर हो गई। इस फिल्म को भोजपुरी सिनेमा का ऐतिहासिक बदलाव वाला क्षण भी माना जाता है क्योंकि इस फिल्म के बाद उसे राष्ट्रीय पहचान मिली और अतिताभ बच्चन जैसे बड़े स्टार ने भी भोजपुरी सिनेमा में काम करने के लिए अपनी सहमति दे दी।
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मनोज तिवारी
3- अपनी लोकप्रियता को भुनाने के लिए मनोज तिवारी ने राजनीति में कदम रखने का फैसला किया और समाजवादी पार्टी की सदस्यता ले ली। चौंका देने वाली बात है कि उन्होंने यूपी के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ा। 
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- फोटो : अमर उजाला
4- 2010 में बिग बॉस में भाग लेने वाले मनोज तिवारी ने जल्द ही अपना राजनीतिक फैसला बदला और 2014 के आम चुनाव के ठीक पहले उन्होंने समाजवादी पार्टी छोड़ बीजेपी में जाने का फैसला किया और उनके इस फैसले के तीन साल के भीतर ही अब वो बीजेपी के बड़े नेताओं में शामिल हो गए हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
5- बिग बॉस के दौरान ही उनके साथ एक कंट्रोवर्सी जुड़ गई जिसे उन्हें और उनकी पत्नी के बीच दूरी बढ़ने का एक बड़ा कारण भी माना जाता है। इस शो के दौरान ही मनोज तिवारी और स्वेता तिवारी के बीच अफेयर की अफवाह तेजी से फैली। 2011 के मध्य में ही मनोज‌ तिवारी और उनकी पत्नी के बीच तलाक की खबरें भी आईं। बता दें कि दोनों के बीच 11 साल लंबा वैवाहिक संबंध था जिसे संकट के बादल घिर आए थे।

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- फोटो : अमर उजाला
6- विवादों से मनोज तिवारी का संबंध पुराना रहा है। 2009 में मुंबई स्थित उनके घर पर शिव सेना ने हमला किया क्योंकि माना जाता है कि उन्होंने शिव सेना के बारे में कुछ विवादित बयान दिया था।

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मनोज तिवारी - फोटो : अमर उजाला
7- जून 2011 में दिल्ली के रामलीला मैदान में अन्ना हजारे के आंदोलन के दौरान मनोज तिवारी ने बाबा रामदेव का खुल कर समर्थन किया और उसी समय ये अटकल तेज हो गई कि मनोज तिवारी बीजेपी में जा सकते हैं। इस दौरान अन्ना हजारे के मंच से उन्होंने कई गीत भी गाए जिससे वो लाइम लाइट में भी आए।

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8- 2014 में बीजेपी में शामिल होने के बाद मनोज तिवारी को उत्तरी दिल्ली से संसदीय चुनाव का टिकट दिया गया ‌जिसे जितने के बाद दिल्ली में उनका कद लगातार बढ़ने लगा। दिल्ली में पूर्वांचली वोटरों को लुभाने में मनोज तिवारी की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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- फोटो : अमर उजाला
9- मनोज तिवारी ने क्रिकेट में भी अपनी रूचि दिखाई है और इंडियन प्रिमियम लीग में बिहार क्षेत्र के नाम से एक टीम को खरीदने की कोशिश भी की। हालांकि उनकी ये कोशिश सफल नहीं हुई लेकिन वो लगातार पूर्व क्रिकेटर और बीजेपी नेता कीर्ति आजाद के संपर्क में रहे हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
10- एमसीडी इलेक्‍शन में मिली बड़ी सफलता के बाद मनोज तिवारी को दिल्ली के भावी मुख्मंत्री के तौर पर भी प्रोजेक्ट करने की बात होने लगी है। क्योंकि माना जा रहा है कि अब दिल्ली में आम आदमी पार्टी के लिए अपनी सरकार बचाना ही बड़ी चुनौती बन गई है।  
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