दिल्ली चिड़ियाघर में एक हाथी ने रविवार सुबह अपने महावत पर हमला कर दिया। हमले में महावत की जान बच गई। लेकिन मामूली रूप से घायल हुए महावत को राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे छुट्टी दे दी गई। चिड़ियाघर प्रशासन इसे सामान्य घटनाक्रम बता रहा है। महावत की पहचान कुलीन बोरो के रूप में हुई है। वह कई सालों से चिड़ियाघर में तैनात है। (सभी फोटो: अमर उजाला, नई दिल्ली)
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जिसने इन्हें सबकुछ सिखाया, उसी को कुचल रहे थे ये हाथी
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चिड़ियाघर प्रशासन के मुताबिक, बाड़ा नंबर-13 में एक हथिनी राजलक्ष्मी और हाथी हीरा है। जबकि तीसरा हाथी अफ्रीकी है, जिसका नाम शंकर है। रोज की तरह तीन हाथियों को सुबह 7 से 9 बजे के बीच सुबह की सैर के लिए बाड़े में के अंदर ही खुले में छोड़ा गया था। उसी दौरान करीब 7:15 बजे अफ्रीकी हाथी व भारतीय हाथी आपस में उलझ गए।
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जिसने इन्हें सबकुछ सिखाया, उसी को कुचल रहे थे ये हाथी
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जानकारी के मुताबिक, हाथी आपस में लड़ने लगे तो महावत कुलीन उन्हें छुड़ाने की कोशिश करने लगा, उसी दौरान हाथी शंकर ने उसे धक्का देकर गिरा दिया। फिर पैर से कुचलने की कोशिश की मगर महावत बाल-बाल बच गया। कुलीन को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। उसे पैर में चोट लगी थी, पैर में किसी भी तरह का फैक्चर नहीं है सिर्फ अंदरूनी चोट है। उपचार के अस्पताल से छुट्टी मिल गई है।
जिसने इन्हें सबकुछ सिखाया, उसी को कुचल रहे थे ये हाथी
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चिड़ियाघर के जनसंपर्क अधिकारी आरए खान ने बताया कि यह एक सामान्य घटना है। हाथी बिल्कुल ठीक हैं। वह रोज सुबह की सैर पर 7 से 9 बजे तक बाहर निकाले जाते हैं। उनके मुताबिक कुलीन दोनों को अलग करना चाहता था उसी समय उसका पैर फिसल गया। हाथी ने सिर्फ हल्का धक्का दिया था। हाथी बिल्कुल ठीक है। तीनों हाथियों को बाड़े में दर्शकों के लिए छोड़ा गया है।
जिसने इन्हें सबकुछ सिखाया, उसी को कुचल रहे थे ये हाथी
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अफ्रीकी हाथी शंकर करीब 18 साल का है। देश के पूर्व राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा को जिम्बाब्वे के किसी डिप्लोमेट ने तोहफे में दिया था। उस समय उन्हें अफ्रीकी हाथी का एक जोड़ा मिला था। लेकिन हथिनी की कई साल पहले मौत हो गई थी। चिड़ियाघर प्रशासन की माने तो वह थोड़ा शरारती है।