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कौन थे जैन मुनि तरुण सागर, जिन पर विवादित टिप्पणी के बाद विशाल डडलानी को छोड़नी पड़ी थी राजनीति

Sat, 01 Sep 2018 12:15 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
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फाइल फोटो
संगीतकार विशाल डडलानी द्वारा जैन मुनि तरुण सागर पर की गई टिप्पणी के बाद काफी फजीहत हुई थी। हालांकि विशाल डडलानी ने बाद में माफी मांग ली थी। इसके बाद विशाल डडलानी ने आम आदमी पार्टी से संन्यास का ऐलान कर दिया था। दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन ने जैन मुनि के पास पहुंचकर उनसे माफी भी मांगी थी। दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने ददलानी को ट्वीटर के जरिए फटकार लगाई थी।
 
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- फोटो : अमर उजाला
आपको बता दें कि जैन मुनि तरुण सागर ने हरियाणा विधानसभा में प्रवचन किया था। इसके बाद विशाल डडलानी ने ट्वीट कर कहा कि जो लोग खुद कपड़े नहीं पहनते वो बता रहे हैं कि महिलाओं को कैसे कपड़े पहनने चाहिए। डडलानी ने ये भी कहा कि यदि आप ऐसे लोगों को वोट देते हैं तो ऐसी ही बेहूदा बकवास को बढ़ावा देते हैं। ये अच्छे दिन नहीं नो कच्छे दिन की शुरुआत है और कुछ नहीं। विशाल के इस कमेंट के बाद सोशल मीडिया पर आलोचना शुरू हो गई जिसके बाद उन्होंने लोगों से माफी भी मांगी लेकिन बात यहीं नहीं रुकी।  जिसका सोशल मीडिया पर जमकर विरोध हुआ।
 
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फाइल फोटो
मामला 2016 का है। विवादित टिप्पणी के बाद जैन समाज में काफी बवाल हुआ था। अंबाला के रहने वाले पुनीत अरोड़ा ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। मामला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा था। जहां उन्हें अंबाला पुलिस के समक्ष पेश होकर तफ्तीश में शामिल होने का आदेश दिया गया था। इसके बाद विशाल के पास दो ही ऑप्शन थे कि वे या तो कानूनी लड़ाई लड़ें या माफी मांग कर निपटारा करें। 21 सितंबर 2016 को विशाल डडलानी ने तरुण सागर से माफी मांगी थी। 

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तरुण सागर
कौन थे जैन मुनि तरुण सागर 
जैन मुनि तरुण सागर जैन धर्म के दिगंबर संप्रदाय के मुनि थे, अपने बेबाक विचारों के लिए मशहूर थे। इनका जन्म 1967 में मध्यप्रदेश के दमोह जिले के गुहजी गांव में हुआ था। उनकी माता का नाम शांतिबाई जैन और पिता का नाम प्रताप चंद्र जैन था। उन्होंने 14 साल की उम्र में 8 मार्च 1981 को घर छोड़ दिया था। छत्तीससगढ़ में उनकी शिक्षा दीक्षा हुई। उन्हें मध्यप्रदेश शासन ने 6 फरवरी 2002 को और गुजरात सरकार ने 2 मार्च 2003 को राजकीय अतिथि का दर्जा दिया था। 
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फाइल फोटो
बचपन से ही उनका झुकाव धर्म की ओर रहा है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत के भी करीबी माने जाते थे। पीएम और संघ प्रमुख अक्सर जैन मुनि के कार्यक्रमों में शामिल होते थे। जैन मुनि हमेशा ही राजनीति और धर्म पर अपने विचारों को खुलकर व्यक्त करते नजर आते थे। उन्होंने हरियाणा विधानसभा में प्रवचन किए थे। तरुण सागर लोकसभा में प्रवचन करना चाहते थे। लेकिन लोकसभा में उनका प्रवचन नहीं हो पाया। इनके प्रवचन की विशेषता है कि वे कड़वी बात कहने से परहेज नहीं करते थे। 
 
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फाइल फोटो
अपनी आलोचना करनेवालों के प्रति उदार रहते थे। ददलानी की तरफ से माफी मांगने गए दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन को भी उन्होंने यही कहा कि माफी की जरूरत नहीं है। कड़वे प्रवचन नाम की एक पुस्तक के जरिए अपने विचारों को लोगों तक पहुंचाया। उनके मुताबिक राजनीति में धर्म की सही रुप में अपनाने की जरूरत है। जैन मुनि ने तथाकथिक लव जिहाद को हिंदू लड़कियों के खिलाफ साजिश बताया था। 
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जैन मुनि तरुण सागर
तरुण सागर का मानना था कि एक संत को हमेशा वही कहना चाहिए जो समाज के लिए हितकारी हो। जैन मुनि देश ही नहीं विदेशों में भी लोकप्रिय थे। दुनिया भर में इनके करोड़ों अनुयायी हैं। जैन मुनि के कार्यक्रमों का सैकड़ों देशों में सीधा प्रसारण होता है।
 
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