फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंकज उधास गजल गायक न होते तो करते ये काम, अमर उजाला से शेयर किए कई दिलचस्प किस्से

Sat, 01 Sep 2018 12:05 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
विज्ञापन
1 of 5
pankaj udhas
मखमली आवाज से दुनिया भर के संगीत प्रेमियों को अपना दीवाना बनाने वाले गजल गायक पंकज उधास आज भी हर वर्ग के लोगों की पसंद है। भारतीय संगीत को ऊंचाइयों  पर ले जाने वाले पद्मश्री पंकज ने अपनी नज्मों और गजलों से सभी पीढ़ी के लोगों के दिलों पर राज किया है। उनकी आवाज में आज भी वो जादू है, जो चार दशक पहले थे। अमर उजाला कार्यालय में शुक्रवार को एक विशेष साक्षात्कार में इस उम्दा फनकार से गजलों व गीतों पर विस्तार से चर्चा हुई। वर्तमान दौर में गजलों के प्रति श्रोताओं का रुख और अपने जीवन के अनछुए पहलुओें पर उन्होंने खुलकर बातचीत की। पेश है उनसे बातचीत के कुछ अंश: 
विज्ञापन

2 of 5
pankaj udhas - फोटो : अमर उजाला
-‘आपका गीत चिट्ठी आई है...’  सुनकर एक शख्स इस कदर प्रभावित हुआ कि विदेश से नौकरी छोड़कर स्वदेश लौट आया। क्या वाकया था?
-वो एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और अमेरिका में जॉब करते थे। उन्होंने मुझे बताया कि आपकी गजल सुनकर मुझे अहसास हुआ कि मैं देश में भी बहुत कुछ कर सकता हूं फिर यहां क्या कर रहा हूं। यही सोचकर देश लौट आया और खुद का व्यवसाय शुरू किया।

-वर्तमान दौर में गजल के भविष्य के बारे में आप क्या सोचते हैं?
-ऐसा वक्त आ गया है कि बहुत  सारे  श्रोता  यह चाहते हैं कि  उनको  जो  पसंद है, वो उनको सुनने को मिले।  ऐसा नहीं है कि गजल के शौकीन नहीं है। तनाव भरी जिंदगी में  हर कोई सुकून से कुछ सुनना चाहता है। ऐसे में मेरा मानना है कि गजल का भविष्य सुरक्षित है।
विज्ञापन

3 of 5
pankaj udhas
-आपके कॅरियर का सबसे यादगार लम्हा कौन सा रहा?
-मैं समझता हूं  मेरे  लिए तो आज का दिन भी यादगार है। यह आप  पर निर्भर करता है कि आप अपने आपको किस काबिल बनाते हैं। जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते  हैं। मैंने अपनी  जिंदगी में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। ऐसे में कह सकता हूं कि मेरे लिए तो हर लम्हा यादगार है।

-गजल गायकी को मंच देने के  लिए क्या किसी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं?
- नए कलाकारों को तराशने के लिए खजाना नाम से कार्यक्रम करते हैं। इसमें नए फनकारों का मौका देते हैं ताकि उन्हें मोटिवेशन मिले। देश में टेलेंट की कमी नहीं है।

4 of 5
pankaj udhas - फोटो : अमर उजाला
-क्या आप मानते हैं कि वर्तमान दौर में गजल पीछे छूटती जा रही है?
-गजलों को नजरअंदाज नहीं कर सकते क्योंकि इसमें बहुत सी चीजें ऐसी हैं, जो सुकून देती है। अब भी गजल गायकी का उतना ही महत्व है जितना पहले था।

-आप गजल गायक न होते तोे क्या होते?
-हर किसी की अलग-अलग इच्छाएं और ख्वाब होते हैं। मैं मानता हूं कि मुझे गजल गाने के लिए भेजा गया। बचपन में क्रिकेट का बहुत शौक था और मैं ऑफ स्पिनर गेंदबाज था। सोचता था कि क्रिकेटर बनूंगा। ऐसे में कह सकता हूं कि गजल गायक न होता तो क्रिकेटर होता।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
pankaj udhas - फोटो : अमर उजाला
-क्या रिमिक्स के दौर में शब्दों का मर्म खत्म होता जा रहा है?
-  रिमिक्स में मुझे एक बड़ी कमी खल रही है, वो है शब्दों की। मैं समझता हूं जब तक शब्द न हो तब तक कोई बात पूरी नहीं होती। रिमिक्स में इसी का अभाव है।

-गजल गायकी से आप भजन की तरफ बढ़ रहे हैं। आखिर दोनों में क्या बदलाव देख रहे हैं?
-संगीत की दुनिया के मेरे दोस्तों की राय थी कि आपकी आवाज में वो बात है, जिसका भक्ति में भी अच्छी तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। यह सोचकर मैनें कृष्णा चेंट एल्बम बनाया है। इसमें भगवान कृष्ण के मंत्रोें को अलग अंदाज में रिकॉर्ड किया है ताकि सभी सुकून से सुन सकें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें