कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न संबंधी मामलों की पारिवारिक व सहजता के माहौल में सुनवाई होगी और उन्हें न्याय दिलवाया जाएगा। इसके लिए यौन उत्पीड़न निरोधक अधिनियम, 2013 के तहत गुड़गांव जिला में स्थानीय शिकायत कमेटी का गठन शुक्रवार को किया गया है। ये भी पढ़ें : देखिए क्या हुआ जब दिल्ली में एक लड़की निकली कंडोम खरीदने कार्यस्थल पर होती हैं यौन उत्पीड़न का शिकार तो यहां करें शिकायत मांस से भरे ट्रक को देख भड़के लोग, पुलिस ने की फायरिंग
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ऑफिस में होती हैं यौन उत्पीड़न का शिकार तो यहां करें शिकायत
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इस बारे में अतिरिक्त उपायुक्त विनय प्रताप ने जानकारी प्रेसवार्ता में दी। उन्होंने बताया कि कमेटी सरकारी और प्राइवेट कार्यालयों में यौन उत्पीड़न के मामलों की सुनवाई के लिए अधिकृत है।
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सभी संस्थानों में आंतरिक शिकायत समिति (इंटरनल कम्पलेंट कमेटी) गठित करना अनिवार्य है। इसमें एक सदस्य एनजीओ से होना चाहिए। इस कमेटी की जांच से असंतुष्ट महिला कर्मचारी जिला स्तर पर गठित की गई लोकल कम्पलेंट कमेटी के पास शिकायत कर सकती है।
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सीधे विकास सदन स्थित कमेटी के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। सप्ताह में दो दिन बुधवार व शुक्रवार को बैठकर उन शिकायतों की सुनवाई करेंगे।
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नवगठित लोकल कम्पलेंट कमेटी की चेयरपर्सन अनुराधा शर्मा ने बताया कि कमेटी को मिलने वाली यौन उत्पीड़न की शिकायतों का 90 दिन में निपटारा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह शिकायत पर निर्भर करेगा कि उसकी सुनवाई कितनी अवधि में करवाई जाए।
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यदि मामला गंभीर मिला तो कमेटी डे-टू-डे बेसिज पर भी सुनवाई कर सकती है और एक सप्ताह के बाद भी आरोपी के खिलाफ यौन उत्पीड़न की एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश कर सकती है।
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कमेटी की चेयरमैन अनुराधा शर्मा को बनाया गया है। अन्य सदस्यों में एनजीओ से सुरभि धींगड़ा, जिला परियोजना अधिकारी सुनैना और अधिवक्ता कुलभूषण भारद्वाज शामिल हैं।
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अतिरिक्त उपायुक्त ने बताया कि जिले में स्थित विभिन्न संस्थाओं, विद्यालयों, कॉलेजों, कंपनियों, संस्थानों आदि को यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों के आंकड़े भेजने के लिए पत्र लिखे गए थे।
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उन पत्रों के लगभग 400 जवाब प्राप्त हुए हैं। इस आधार पर पता चल पाया है कि सितंबर 2015 तक 8 प्रतिशत संस्थाओं में यौन उत्पीड़न की शिकायतें मिली हैं और 63 प्रतिशत संस्थाओं ने यह माना है कि वे इस अधिनियम से वाकिफ है।