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जेएनयू में बवाल पर प्रशासन को देने होंगे इन पांच सवालों के जवाब

Mon, 06 Jan 2020 01:57 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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jnu violence - फोटो : अमर उजाला
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस में रविवार को छात्रों के दो गुटों में जमकर मारपीट हुई। छात्रसंघ ने मारपीट व तोडफ़ोड़ का एबीवीपी पर आरोप लगाया है। जबकि एबीवीपी का कहना है कि यह सब लेफ्ट ने किया है। रविवार देर शाम नकाब पहने 40 से 50 युवकों की भीड़ कैंपस में पहुंची। छात्रों, हॉस्टल, वाहनों आदि पर लाठियों, पत्थरों से हमला किया। इस हमले में जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आईषी घोष, वरिष्ठ महिला शिक्षक सुचित्रा सेन को सिर में गंभीर चोट आयी हैं। इसके अलावा 30 से अधिक छात्र व शिक्षक भी घायल हुए हैं।
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jnu violence - फोटो : अमर उजाला
जेएनयू कैंपस में आठ अक्तूबर से हॉस्टल फीस बढ़ोतरी को लेकर छात्रसंघ समेत आम छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है। छात्रों ने दिसंबर सेमेस्टर परीक्षा का बहिष्कार किया था। इसी के तहत पांच जनवरी यानी रविवार को विंटर सेमेस्टर में दाखिले के लिए रजिस्ट्रेशन आ आखिरी दिन था। दो दिन तक लेफ्ट संगठनों ने सर्वर रूम पर कब्जा करके रजिस्ट्रेशन में बाधा पहुंचायी थी। रविवार शाम को कैंपस के टी प्वाइंट के सामने छात्र विरोध दर्ज कर रहे थे। थोड़ा अंधेरा होते ही कैंपस में अचानक 40 से 50 युवकों की भीड़ चेहरे पर नकाब पहने हाथों में लाठियां लेकर आते हैं और छात्रों से मारपीट, तोडफ़ोड शुरू कर देते हैं। युवकों की भीड़ ने गर्ल्स हॉस्टल में जाकर शीशे तोड़े और छात्राओं से भी मारपीट की।
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कैंपस में देर रात तक विरोध प्रदर्शन

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जेएनयू छात्रा - फोटो : अमर उजाला
जेएनयू छात्रसंघ और शिक्षक संघ ने इस पूरी घटना पर विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार से जवाब मांगा है। इसके अलावा कुलपति प्रो. कुमार से इस्तीफे की भी मांग रखी है। कैंपस में एक ओर एबीवीपी विरोध कर रहा है तोदूसरी ओर लेफ्ट छात्रसंगठन विरोध दर्ज करवा रहा है। दोनों गुट एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

चार घंटे अराजकता का माहौल, कुलपति नदारद, पुलिस को कैंपस में एंट्री नहीं मिली

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इलाज करवाता जेएनयू छात्र - फोटो : अमर उजाला
कैंपस में चार घंटों तक अराजकता का माहौल रहा, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन सामने तक नहीं आया। प्रशासन ने जख्मी छात्रों को अस्तपाल तक नहीं पहुंचाया। इसके अलावा कैंपस को शांत करने केलिए पुलिस को कैंपस के अंदर आने तक नहीं दिया गया। पुलिस मुख्य गेट के बाहर खड़ी रही। करीब पौने नौ बजे पुलिस को कैंपस के अंदर आने की अनुमति मिली। इसके बाद पुलिस हॉस्टल, कैंपस में जांच करने पहुंच पायी।
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जेएनयू प्रोक्टर व बीजेपी लीडर सतेंद्र अवाना भी शामिल एनसाई बालाजी

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जेएनयू में नाकाबपोश बदमाश - फोटो : अमर उजाला
जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एनसाई बालाजी ने इस पूरी घटना का आरोप एबीवीपी पर लगाया है। बालाजी का कहना है कि भीड़ के बीच बीजेपी नेता सतेंद्र अवाना भी शामिल थे। इसमें जेएनयू के एक प्रोक्टर भी शामिल थे, जिनके इशारे पर यह पूरी घटना हुई है। एबीवीपी डीयू के सदस्य मारपीट करने वालों में शामिल थे।
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लेफ्ट ने छात्रों को रजिस्ट्रेशन करने पर रोका और मारपीट का ड्रामा किया एबीवीपी

जेएनयू एबीवीपी के अध्यक्ष दुर्गेश कुमार ने छात्रसंघ के आरोपों का नकारा है। दुर्गेश का कहना है कि लेफ्ट छात्र संगठन आखिरी दिन छात्रों को विंटर सेमेस्टर के लिए रजिस्ट्रेशन करने से रोक रहे थे। लेफ्ट संगठनों के छात्रों ने रजिस्ट्रेशन करने वाले छात्रों पर पहले पत्थर मारे और उसके बाद हमला किया। नकाब पहनकर हमला करने के पीछे भी लेफ्ट का हाथ है। क्योंकि दो दिन तक लेफ्ट छात्रों ने सर्वर रूम बंद कर विश्वविद्यालय का कामकाज रोका था। एबीवीपी ने यदि मारपीट की होती तो उनके पंद्रह छात्र कैसे जख्मी होते?
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कैंपस को सुरक्षित रखना प्रशासन व वार्डन की जिम्मेदारी

जेएनयू कैंपस में घंटों तक तोडफ़ोड़, मारपीट, पत्थरबाजी चल रही है, लेकिन प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहा। यह बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों पर भी हमला किया गया। गर्ल्स हॉस्टल में जाकर तोडफ़ोड़ व मारपीट की गयी है।  कैंपस में सुरक्षा गार्ड के बीच मारपीट करने वाले छात्रों को सुरक्षा गार्ड या वार्डन ने क्यों नहीं रोका?
-प्रो. एसके सोपोरी, पूर्व कुलपति, जेएनयू।
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इन सवालों के विश्वविद्यालय प्रशासन को देने होंगे जवाब?

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जेएनयू के घायल छात्र-छात्रा - फोटो : अमर उजाला
  • सुरक्षा गार्ड हर गेट पर तैनात होते हैं। ऐसे में हाथों में लाठी लेकर बाहरी युवा कैंपस में कैसे प्रवेश करते हैं?
  • कैंपस में चार घंटे तक अराजकता का माहौल रहा, ऐसे में सुरक्षा गार्ड ने उन युवकों को रोकने की कोशिश क्यों नहीं की?
  • चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर केपास अधिकार रहता है कि कैंपस में इस प्रकार छात्र गुटों में मारपीट होने पर वह पुलिस को बुला सकता है। ऐसे में रविवार को जब कैंपस व हॉस्टल व ढाबा में मारपीट चल रही तो उन्होंने पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी?
  • जेएनयू कैंपस के अंदर ही कुलपति, रजिस्ट्रार समेत अन्य पदाधिकारियों के भी घर हैं। कैंपस में इतनी मारपीट होने केबाद विश्वविद्यालय प्रशासनिक अधिकारी होने केनाते वे घरों से बाहर क्यों नहीं निकले?
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