सात सौ साल पुराना नृत्य कर यहां होती है सिद्घि
Tue, 03 Feb 2015 07:46 PM IST
सिद्धिगोमा, यह लगभग सात सौ साल पुरानी सभ्यता का नृत्य है, लेकिन रिदम ऐसा कि हर कोई झूम उठे। (सभी फोटो: अमर उजाला ब्यूरो)
सात सौ साल पुराना नृत्य कर यहां होती है सिद्घि
गुजरात का आदिवासी सिद्धिगोमा ऐसा ही नृत्य है जिसकी प्रस्तुति शुरू होते की लोग झूमना शुरू कर देते हैं।
सात सौ साल पुराना नृत्य कर यहां होती है सिद्घि
मंगलवार को चौपाल पर इसकी प्रस्तुति देखकर न सिर्फ लोग झूम उठे बल्कि इसके कारनामों व भाव भंगिमाओं को देखकर दांतों तले उंगली दबा ली।
सात सौ साल पुराना नृत्य कर यहां होती है सिद्घि
जब इन आदिवासी कलाकारों ने ड्रम की थाप पर सो बिलाल-सो बिलाल गोमा गोमा सिद्धिगोमा...सिद्धिगोमा की धुन पर नृत्य करना शुरू किया तो लोग देखते रह गए।
सात सौ साल पुराना नृत्य कर यहां होती है सिद्घि
चेहरे पर गजब का हावभाव प्रदर्शित करते हुए करीब आधे घंटे तक नृत्य किया। जब नृत्य खत्म होने को हुआ तो लोगों की सांसें थम सी गईं।
सात सौ साल पुराना नृत्य कर यहां होती है सिद्घि
अंत में इसके दो कलाकारों ने नारियल ऊपर फेंका और फिर सिर पर गिराकर उसे फोड़ दिया। सिर से नारियल फोड़ने की कला देखकर लोग दंग रह गए।
सात सौ साल पुराना नृत्य कर यहां होती है सिद्घि
आदिवासी सिद्धिगोमा जाति करीब सात सौ साल पहले दक्षिणी अफ्रीका से समुद्री जहाजों द्वारा यहां आई थी और फिर यहीं की मिट्टी में रच बस गई। लेकिन उन्होंने अपनी परंपराएं नहीं छोड़ीं।