पश्चिम दिल्ली के नांगलोई का एक घर रविवार से ही बहुत खास हो गया है। जिस घर को रविवार से पहले मास्टरजी के घर के नाम से जाना जाता था अब वो सुमित नागल के घर के नाम से पहचाना जाने लगा है।(सभी फोटोः फेसबुक अकाउंट) (यह फोटोः द हिंदु)
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PICS: एक डर ने सुमित को बना दिया भारत का उभरता सितारा
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53 वर्षीय सुरेश नागल जो रविवार से पहले तक मास्टर जी के नाम से जाने जाते थे अब वो सुमित के पिता के नाम से भी पुकारे जाने लगे हैं। (फोटोः द हिंदु)
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सुरेश नागल का वही घर जिसके बारे में कोई नहीं जानता था अब वहीं आस-पास के लोगों समेत मीडिया कर्मियों का भी तांता लगा हुआ है। इन सबसे वो ना ही परेशान हैं और ना ही सैकड़ों कॉल रिसीव करने से थके हैं बल्कि उन्हें तो इन सब पर गर्व हो रहा है। ऐसा सब इसलिए हुआ है क्योंकि उनके बेटे सुमित नागल ने विंबलडन जैसी प्रतियोगिता में जूनियर डबल्स का खिताब जीतकर देश का नाम लंदन में जो रोशन किया है।
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अपने बेटे की उपलब्धि बताते हुए नागल कहते हैं कि उन्हें अपने बेटे की सफलता पर बहुत नाज है। सुरेश हमेशा से ही चाहते थे कि उनका बेटा सुमित टेनिस खेलते हुए टॉप लेवल तक जाए। वो कहते हैं कि विंबलडन की ये जीत उसके अंदर बहुत विश्वास पैदा करेगी।
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एक दशक से भी ज्यादा पहले आर्मी से रिटायर हुए वर्तमान में एमसीडी के स्कूल के अध्यापक, सुमित के पिता सुरेश बताते हैं कि वो हमेशा से टेनिस के बहुत बड़े फैन रहै हैं और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका बेटा इतना ऊंचा जाएगा। (फोटोः द हिंदु)
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सुरेश ने बताया कि सुमित 7 साल की उम्र से ही डीडीए के पश्चिम विहार स्थित टेनिस अकेडमी से प्रशिक्षण ले रहा है। जब सुमित दस साल का था तब महेश भूपति की नजर उसपर पड़ी और तब से वो उन्हीं के संरक्षण में ट्रेनिंग आदि ले रहा है।
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सुमित की बहन साक्षी उनके टेनिस में आने की एक दिलचस्प कहानी बताती हैं। कह सकते हैं कि सुमित के परिवार का एक डर था जिसने सुमित को भारतीय टेनिस का एक नया सितारा बना दिया। साक्षी कहती हैं कि सुमित को टेनिस कोचिंग में डालने का एक प्रमुख कारण उसे कॉलोनी के बच्चों से दूर रखना था।
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साक्षी बताती हैं कि जहां उनका घर है वहां के बच्चे संगति के लायक नहीं है और टेनिस उनके भाई को इनकी संगति से रोजाना घंटों के लिए दूर रखता था।
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साक्षी अपने भाई की कामयाबी से खासी उत्साहित हैं और कहती हैं कि उनके शरारती भाई की इस उपलब्धि से वो बहुत ज्यादा खुश हैं।
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साक्षी का कहना है कि उनका भाई हमेशा अपनी मां से एक भाई लाने की जिद करता था क्योंकि दीदी उसके साथ टेनिस की प्रैक्टिस नहीं करती।
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अब उनकी इस कामयाबी के बाद तो सभी इतने खुश और उनसे मिलने के लिए बेताब हैं जिसे वे शब्दों में बयां नहीं कर सकते।
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अपने भाई के शौक के बारे में बताते हुए साक्षी कहती हैं कि सुमित को हर साल 15 अगस्त का बेसब्री से इंतजार रहता है ताकि वो जी भर कर पूरे दिन पतंग उड़ा सके। हालांकि बीते कुछ समय में सुमित का शौक बदला है और अब वो अगले महीने अपने आने वाले जन्मदिन का वेट कर रहे हैं ताकि उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस मिल सके और वो अपनी फेवरिट डुकाटी खरीद सकें।
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हरियाणा झज्जर में जन्में इस दिल्ली के छोरा आखिरी बार पिछले महीने में दिल्ली आया था जब उसे वीएफएस सेंटर में लंदन का वीजा अप्लाई करना था।
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साक्षी बताती हैं कि सुमित का फेवरिट क्ले कोर्ट है क्योंकि उन्होंने ग्रास कोर्ट पर ज्यादा प्रैक्टिस नहीं की है और यही वजह है कि वो विंबलडन से पहले काफी नर्वस थे। सुमित राइट हैंड प्लेयर हैं और डबल हैंड से वो बैक हैंडेड प्लेयर हैं।
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हालांकि सुमित की डायट पर एक्सपर्ट्स बारीकी से नजर रखते हैं लेकिन जब वो घर पर होता है तो उसे अपनी मां कृष्णा के हाथ के कढ़ी चावल और दही भल्ले खाने होते हैं जो उसे बहुत पसंद हैं।
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साक्षी कहती हैं कि उनका परिवार अभी नहीं कह सकता कि सुमित वापस घर कब आएंगे। लेकिन वो आशा करते हैं कि कम से कम इस बार तो सुमित विंबलडन ट्रॉफी अपने साथ लेकर आएंगे।