स्टेशन पर उमड़ी लोगों की भीड़
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क्यों हैं गंभीर खामियां?
यात्रियों के अनुसार, इस घटना से यह सवाल उठता है कि इतने वर्षों के बाद भी रेलवे प्रशासन ने इन हादसों से कोई ठोस सबक क्यों नहीं लिया? जब इतने बड़े स्टेशन पर भारी भीड़ होती है, तो वहां का सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन व्यवस्था में गंभीर खामियां क्यों हैं? क्या यह प्रशासन की सुस्ती, लापरवाही और अव्यवस्था का परिणाम है? हालांकि रेलवे प्रशासन हर बार कहता है कि प्लेटफार्म बदलाव की जानकारी यात्रियों को समय पर दी जाती है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या उस जानकारी को सही तरीके से लागू किया जा रहा है? क्या यात्रियों के लिए सुगम रास्तों और उचित व्यवस्था की योजना बनाई गई है? एक तरफ जहां रेलवे के पास पर्याप्त संसाधन और समय है, वहीं इस तरह के हादसों को रोकने के लिए प्राथमिक कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं?