डॉ. मनीष गुप्ता
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रहने लगे थे अधिक खामोश
डॉ. गुप्ता को जानने वाले लोगों के मुताबिक घटना से करीब तीन-चार दिन पहले वह सामान्य से अधिक खामोश और अलग-थलग रहने लगे थे। कुछ पड़ोसियों ने बताया कि वह पहले की तुलना में कम बातचीत कर रहे थे, जबकि कुछ मरीजों ने भी उनके व्यवहार में बदलाव महसूस किया था। हालांकि उस समय किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।