आजादी दे रहा हूं, शाहीन बाग का खेल खत्म...। बृहस्पतिवार दोपहर को जामिया मिल्लिया इस्लामिया से राजघाट के बीच निकाले जाने वाले पैदल मार्च के दौरान गोली चलाने वाले लड़के ने वारदात से कुछ देर पहले फेसबुक पर लाइव वीडियो बनाकर आजादी देने की बात करने के अलावा शाहीन बाग का खेल खत्म होने की बात की थी। चंद ही मिनटों में कई बार लाइव होने के बाद आरोपी ने कई भड़काऊ पोस्ट भी डालीं।
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गोली लगने से घायल
- फोटो : अमर उजाला
मीडिया में जब आरोपी का नाम और फोटो आया तो लोगों ने उसके फेसबुक अकाउंट को खोलकर उसकी स्क्रीन शॉट लेना शुरू कर दिया। बाद में इसे सोशल मीडिया पर भी डाला जाने लगा। दोपहर बाद किसी ने आरोपी के फेसबुक अकाउंट को डिलीट कर दिया। आरोपी ने फेसबुक पर रामभक्त... (आगे नाम भी लिखा है) के नाम से अकाउंट बनाया हुआ था।
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पुलिस की गिरफ्त में नाबालिग
- फोटो : अमर उजाला
प्रोफाइल फोटो में वह एक तलवार लेकर उसे चूमता दिख रहा है। गोली चलाने से पहले वह पांच बार फेसबुक पर लाइव हुआ। वीडियो में कह रहा है कि आजादी दे रहा हूं, शाहीन बाग का खेल खत्म, मेरी अंतिम यात्रा पर मुझे भगवा में ले जाएं और श्रीराम के नारे हों। फेसबुक अकाउंट में पहले से कई भड़काऊ वीडियो और टिप्पणी भी लिखी थीं। उसके आधार पर पुलिस छानबीन कर रही है। पुलिस गोली चलाने के उद्देश्य की छानबीन कर रही है।
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पिस्टल लहराता हुआ नाबालिग
- फोटो : अमर उजाला
शाहीन बाग का रास्ता खोलने पर दो खेमों में बंटे प्रदर्शनकारी
नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध में शाहीन बाग इलाके में पिछले 46 दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच बृहस्पतिवार को प्रदर्शनकारी दो खेमे में बंटे हुए नजर आए। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से शाहीन बाग पर चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम के बाद प्रदर्शनकारियों का एक धड़ा बंद रोड की एक साइड खोलने के पक्ष में था। इसे लेकर प्रदर्शनकारी दिनभर आपस में चर्चा करते रहे, लेकिन देर रात तक इस पर कोई सहमति नहीं बन पाई। इससे पूर्व एलजी से मुलाकात के बाद भी प्रदर्शनकारी दो गुटों में बंट गए थे।
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प्रदर्शन करते हुए
- फोटो : अमर उजाला
प्रदर्शनकारियों का एक गुट राजनीतिक घटनाक्रम के बाद सड़क खोलने के पक्ष में था। दिन में इस पर लगभग सहमति भी बन गई थी। पहले शाम छह बजे प्रेसवार्ता आयोजित करने की घोषणा कर दी गई, लेकिन बाद में जब भारी विरोध हुआ तो प्रेस कांफ्रेंस का समय बदलकर रात आठ बजे कर दिया। स्थानीय लोगों को जब एक ओर की सड़क खोलने के प्रस्ताव का पता चला तो उन्होंने विरोध किया। इसके बाद प्रेस वार्ता का समय तीसरी बार बदलकर रात 11 बजे कर दिया।
कुछ प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शाहीन बाग को चुनावी मुद्दा बनाकर कुछ राजनीतिक पार्टियां उनको टूल की तरह इस्तेमाल कर चुनावी समीकरण बदलना चाहती हैं। इन मंसूबों पर पानी फेरने के लिए सड़क को एक ओर से खोलने का फैसला किया गया था, लेकिन इसके लिए लेाग तैयार नहीं हुए। प्रदर्शन पर बैठी महिलाएं पहले से ही रास्ता खुलवाने के खिलाफ हैं। इधर, देर रात को दोनों गुट आपस में उलझ गए और उनमें धक्का मुक्की भी हुई। खबर लिखे जाने तक शाहीन बाग का माहौल गरम था।