पति की चौधर बचाने के लिए सौतन लाने वाली सिंगार गांव के पूर्व सरपंच हनीफ की पत्नी का प्रयास काम नहीं आया। हनीफ की दूसरी पत्नी चुनाव हार गई। ऐसे में उसके पति की चौधर भी चली गई और एक सौतन भी खड़ी हो गई। दरअसल सिंगार के लोगों ने सौतन पर नहीं, बल्कि गांव की इंजीनियर बेटी आमना खान पर भरोसा जताया है। (सभी फोटोः ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव)
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'सौतनों' को हरा इस इंजीनियर बेटी ने जीत लिया सरपंच का ताज
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ऐसे आई सौतनः पेशे से ट्रक ड्राइवर हनीफ चुनाव लड़ 2010 में गांव के सरपंच बने थे। इस बार गांव की सरपंची महिला के लिए आरक्षित थी। इसमें हनीफ ने अपनी पहली पत्नी को चुनाव लड़ाना चाहा तो इसमें शिक्षा की शर्त बाधा बन गई है।
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इस पर पति की चौधर को कायम रखने के लिए पहली पत्नी जाहिरा ने 11 सितंबर को दो बच्चों की मां और विधवा दसवीं पास संजीदा से पति का निकाह करवा दिया। लेकिन गांव के समाज ने इसे ठीक नहीं समझा और सिरे से नकारते हुए हार का मुंह दिखा दिया।
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आमना खान ने इंजीनियर बनने के बाद भी लाखों के पैकेज को छोड़ कर गांव के विकास को महत्वपूर्ण माना है। इससे सिंगार गांव सहित आस-पास के क्षेत्रों में भी आमना का सरपंच बनना चर्चा का विषय बना हुआ है।
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लोगों ने जहां पढ़े लिखे युवाओं की पंचायत की पहल का स्वागत किया है, वहीं दूसरी ओर अविवाहिता आमना खान के सरपंच बनने को मेवात में एक नए बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
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आमना का कहना है कि वो गांव के विकास पर पूरा ध्यान देंगी और बेटियों को शिक्षा में आगे लाने का काम करेंगी।
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बता दें कि अपने पति की चौधर को बचाने के लिए सौतन लाने का पैंतरा जिले के सबसे बड़े गांव सिंगार के मतदाताओं को पंसद नहीं आया।
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चुनाव लड़ने के लिए लाई गई दसवीं पास संजीदा के बजाय ग्रामीणों ने राजनीति से जुड़े शाहब खां पटवारी की पुत्री बीटेक पास आमना खान को चौधर की लड़ाई में पास कर गांव की चौधर सौंप दी।