फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यहां रोज लगती है मासूमों के जान की बाजी, ताकि होती रहे पढ़ाई!

विज्ञापन
1 of 7
फरीदाबाद में भले ही ट्रांसपोर्टेशन फीस के नाम पर आप मोटी रकम चुका रहे हों, लेकिन इसके बाद भी स्कूली वाहनों में आपका लाडला सुरक्षित नहीं है। इसमें सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है। (सभी फोटो: अमर उजाला ब्यूरो/फरीदाबाद)
विज्ञापन

यहां रोज लगती है मासूमों के जान की बाजी, ताकि होती रहे पढ़ाई!

2 of 7
पुलिस को न तो इसकी परवाह और न ही प्रशासन को फिक्र। एक सप्ताह में स्कूली बच्चों के साथ दो बड़े हादसे होने के बाद भी सरकारी तंत्र की नींद नहीं टूटी है। शहर की सड़कों पर नियमों की धज्जियां उड़ाते स्कूली वाहन खुलेआम दौड़ रहे हैं। गौरव चौधरी ने जायजा लिया।
विज्ञापन

यहां रोज लगती है मासूमों के जान की बाजी, ताकि होती रहे पढ़ाई!

3 of 7
बच्चों की सुरक्षा की गारंटी देने वाली स्कूल संचालक अभिभावकों को धोखा दे रहे हैं। ट्रांसपोर्ट फीस पूरी वसूली जाती है और बसों में बच्चों को पूरी सीट भी नहीं मिलती। सेक्टर-15ए में अंदर 50 बच्चों की क्षमता वाली बस में 70 से अधिक बच्चे बैठे दिखे। एक सीट पर चार बच्चे बैठे थे, जबकि कई बच्चे खड़े होकर ही सफर करने को मजबूर थे।

यहां रोज लगती है मासूमों के जान की बाजी, ताकि होती रहे पढ़ाई!

4 of 7
बस और ऑटो ही नहीं बल्कि स्कूलों में अवैध तरीके से चल रही वैन भी बड़े हादसे का सबब बन सकती हैं। छह सीटर में 16 से 18 बच्चों को ढोती हुई वैन शहर की सड़कों पर कहीं भी दिख जाएंगी। इनकी बनावट से छेड़छाड़ कर अतिरिक्त सीटें लगाई जाती हैं। कई वैन तो अवैध सीएनजी और एलपीजी किट पर दौड़ रही हैं। सिलेंडर के ऊपर भी बच्चों को बैठा दिया जाता है।
विज्ञापन

यहां रोज लगती है मासूमों के जान की बाजी, ताकि होती रहे पढ़ाई!

5 of 7
स्कूली बच्चों से भरा ऑटो पलटने की घटना हुए अभी एक सप्ताह भी पूरा नहीं हुआ है और लापरवाही का खेल खुलेआम शुरू हो गया है। एनएच-पांच स्थित एक निजी स्कूल के बच्चों से ओवरलोड ऑटो नौनिहालों की जिंदगी खतरे में डालता दिखा। चालक ने कम से कम 12 बच्चों को ऑटो में लादा हुआ था। ड्राइवर साइड और पिछले हिस्से पर अवैध सीट लगाकर बच्चों को ढोया जा रहा था।
विज्ञापन

यहां रोज लगती है मासूमों के जान की बाजी, ताकि होती रहे पढ़ाई!

6 of 7
निजी स्कूलों की बसों और अन्य वाहनों की चेकिंग का अभियान समय-समय पर चलाया जाता है। इससे संबंधित शिकायत फोटो सहित फेसबुक के जरिये भी की जा सकती है। त्वरित कार्रवाई की जाएगी। -जयदीप कुमार, सचिव, परिवहन प्राधिकरण फरीदाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन

यहां रोज लगती है मासूमों के जान की बाजी, ताकि होती रहे पढ़ाई!

7 of 7
वैन और ऑटो वाले अधिक मुनाफे के लिए मनमानी करते हैं। स्कूल संचालकों को भी बच्चों की सुरक्षा के प्रति गंभीरता बरतनी होगी। पुलिस और परिवहन विभाग को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। -एसके शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, रोड सेफ्टी आर्गेनाइजेशन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें