दिल्ली में बृहस्पतिवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय और सांसद रमेश बिधूड़ी जैन मुनि का अनशन तुड़वाने जंतर मंतर पहुंचे थे। उनकी कोशिश राजधानी के जैन समुदाय के मतदाताओं पर पकड़ मजबूत करने की थी। लेकिन जैन मुनि ने अनशन तोड़ने से मना कर दिया। (सभी तस्वीरें: विवेक निगम/अमर उजाला)
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संत की बात सुनते ही गुस्से से क्यों तमतमा गए सतीश?
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यही नहीं, उन्होंने भाजपा को कटघरे में खड़ा किया गया। बाद में बगैर मकसद पूरा किए बिना दोनों नेता वापस लौट गए। तिहाड़ जेल में बंद संत गोपाल दास की रिहाई और गोरक्षा के लिए जैन मुनि प्रभसागर पिछले कई दिनों ने अनशन पर हैं। जंतर-मंतर पर उनका अनशन जारी है।
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संत की बात सुनते ही गुस्से से क्यों तमतमा गए सतीश?
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बृहस्पतिवार को प्रदेश भाजपा की तरफ से संदेश आया कि प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय और सांसद रमेश बिधूड़ी जैन मुनि का अनशन तुड़वाने जा रहे हैं। दोनों नेता दोपहर बाद करीब 4 बजे अपने लाव-लश्कर के साथ जंतर-मंतर पर पहुंचे। मंच पर पहुंचते ही सतीश उपाध्याय ने कहा कि आप जैसे लोगों को समाज को बेहद जरूरत है।
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जैन मुनि का दो टके का जवाब सुनकर वह भौंचक रह गए। लेकिन थोड़ा संभलने हुए उन्होंने कहा कि यह मुनि हैं। दिन उतरते समय अपना उपवास नहीं तोड़ते। लिहाजा हम कल फिर आएंगे। इसके बाद वह वापस लौटने लगे।
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आपकी मांगों को पूरा करने की हम सभी कोशिश कर रहे हैं। आप अनशन तोड़ दीजिए। लेकिन जैन मुनि ने पहले उपाध्याय की बात को अनमने ढंग से सुना। बाद में एक वाक्य में जवाब दिया कि ठीक है। आपको इतनी चिंता है तो कल दोपहर बाद दो बजे आइए। आज संभव नहीं है।