गुडग़ांव का नाम बदलकर गुरुग्राम करने को लेकर कारपोरेट लॉबी और भाजपा विरोधी सवाल उठा रहे हैं। वह इसे गैरजरूरी बता रहे हैं। लाल झंडे वाले बोल रहे हैं कि गुडग़ांव के नाम का 'संघीकरण' हो गया है। द्रोणाचार्य के नाम पर साइबर सिटी गुडग़ांव का नाम कर देना भाजपा और संघ का हिडेन एजेंडा है।
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- फोटो : अमर उजाला
लोगों के इन आरोपों की पुष्टि गुडग़ांव में आरएसएस के कार्यालय को देखकर हो रही है। आरएसएस के लोग तो पहले से ही गुरुग्राम ही लिख रहे हैं। सेक्टर-12ए स्थित आरएसएस के स्थानीय कार्यालय माधव भवन का साइन बोर्ड और भवन पर लगा बोर्ड इसका बड़ा उदाहरण है।
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इस पर गुरुग्राम ही लिखा हुआ है। हालांकि आरएसएस के सह प्रांत संघचालक पवन जिंदल का कहना है कि गुडग़ांव बनाम गुरुग्राम में आरएसएस और भाजपा का कोई एजेंडा नहीं है।
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सीटू के प्रदेश महासचिव सतवीर सिंह कहते हैं कि मनोहर सरकार ने अपने अब तक के कार्यकाल में सिवाय आरएसएस और भाजपा के एजेंडे को आगे बढ़ाने के कुछ नहीं किया है। गुरुग्राम नाम तो गुडग़ांव के नाम का संघीकरण है।
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शहर के स्थानीय लोगों से लेकर कारपोरेट तक सभी गुडग़ांव और गुडग़ांवां कहते रहे हैं और भविष्य में भी इसी नाम से पुकारेंगे। गुरुग्राम नाम को तो संघर्ष करना पड़ेगा। नाम बदलने के लिए कोई जनमत नहीं कराया गया है। जबकि इतना बड़ा फैसला करने से पहले जनमत करवाया जाना चाहिए था।
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उधर, भाजपा के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र चौहान का कहना है कि कारपोरेट लॉबी और भाजपा विरोधी गुरुग्राम नाम रखने पर आपत्ति जता रहे हैं लेकिन यह नहीं बता पा रहे हैं कि आखिर इसका नुकसान क्या है। बंगलौर का नाम बंगलूरू करने का क्या नुकसान हुआ।
गुडग़ांव का नाम गुरुग्राम करके उसके इतिहास के साथ न्याय किया गया है। इसके नाम का कोई संघीकरण नहीं हुआ है। संघ ने तो अपनी किसी भी सभा में नाम बदलने का प्रस्ताव पारित नहीं किया था।