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एक पैसे का सिक्का लेकर कराची से आए जेठमलानी ने तय किया 25 लाख रुपये फीस तक का सफर

Mon, 09 Sep 2019 09:11 AM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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राम - फोटो : self
पूर्व केंद्रीय मंत्री और दिग्गज वकील राम जेठमलानी का 95 साल की उम्र में रविवार को निधन हो गया। कुछ दिनों से बीमार चल रहे जेठमलानी ने अपने आधिकारिक आवास पर सुबह करीब 7:45 बजे अंतिम सांस ली। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में विधिमंत्री रहे जेठमलानी को आपराधिक मामलों का विशेषज्ञ माना जाता था। कानून की बारीकियों के बेताज बादशाह राम जेठमलानी ने अपने वकालत के करियर में देश के तकरीबन तमाम बड़े हाईप्रोफाइल माने गए मुकदमों से वकील के तौर पर वास्ता रखा। उन्हें इसके लिए मीडिया की सुर्खियां भी मिलीं। उनकी ख्याति देश के सबसे महंगे वकीलों में की जाती रही। आगे जानिए कैसे उन्होंने तय किया फर्श से अर्श तक का सफर...
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ram jethmalani - फोटो : पीटीआई
कहा जाता है कि वह एक मुकदमा लड़ने के लिए 25 लाख रुपये की फीस लेते थे। लेकिन खुद जेठमलानी की मानी जाए तो इस महंगी फीस तक का सफर तय करने के लिए जब वह बंटवारे के समय पाकिस्तान के कराची से अपना सबकुछ छोड़कर भारत आए थे तो उनकी जेब में महज एक पैसे का सिक्का ही मौजूद था।
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ram jethmalani - फोटो : पीटीआई
राम जेठमलानी ने अपने करियर का पहला केस अपने लिए ही लड़ा था। महज 17 साल की उम्र में एलएलबी की डिग्री हासिल करने वाले जेठमलानी को वकील बनने के लिए न्यूनतम 21 साल की उम्र तय होने के कारण वकालत की इजाजत नहीं मिली। जेठमलानी ने इस नियम को सिंध कोर्ट में चुनौती दी और जीतकर 18 साल की उम्र में वकालत का करियर शुरू किया।

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ram jethmalani - फोटो : पीटीआई
बंटवारे से पहले सिंध प्रांत में वकालत करने वाले जेठमलानी कराची में देश विभाजन के कारण दंगे भड़कने पर फरवरी, 1948 में भारत आए। उस समय उनकी जेब में महज एक पैसे का सिक्का था, जो शरणार्थी शिविरों में रहने के दौरान खर्च हो गया। बाद में उन्होंने आजाद भारत में अपना वकालत का करियर बांबे रिफ्यूजी एक्ट के खिलाफ बांबे हाईकोर्ट में मुकदमा लड़कर शुरू किया था। 
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- फोटो : पीटीआई
इसके बाद तमाम ऐसे चर्चित मामले रहे, जहां आरोपी पक्ष की तरफ से उतरने के बावजूद जेठमलानी ने अपने कानूनी दांव पेचों से जमकर सुर्खियां बटोरीं। वह बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन भी चार बार रहे। बैडमिंटन खेलने के शौकीन जेठमलानी के पास एक से एक महंगी कारों और कीमती घड़ियों का भी संग्रह था। राम जेठमलानी के पुत्र महेश जेठमलानी भी सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों में गिने जाते हैं।
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राम जेठमलानी को श्रद्धांजलि देने पहुंचे अमित शाह - फोटो : ANI

इन चर्चित मुकदमों से जुड़े रहे जेठमलानी

1. इंदिरा गांधी हत्याकांड - जेठमलानी ने पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या के आरोपियों की तरफ से केस लड़ा।
2. राजीव गांधी मर्डर केस - पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश में शामिल तीन लोगों का अदालत में बचाव किया।
3. जेसिका लाल हत्याकांड - कांग्रेस नेता के पुत्र मनु शर्मा के वकील के रूप में अदालत पहुंचकर उसके पक्ष में दलीलें दीं। 
4. नौसेना कमांडर नानावटी केस - पत्नी के कथित प्रेमी की हत्या करने वाले नौसेना कमांडर के खिलाफ जेठमलानी की पैरवी बेहद चर्चित रही।
5. बिहार का चारा घोटाला - इस बहुचर्चित मामले में जेठमलानी ने पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की तरफ से पैरवी की।
6. आडवाणी पर हवाला आरोप - दिग्गज भाजपा नेता एलके आडवाणी का नाम हवाला मामले में उछलने पर अदालत में उनकी पैरवी की।
7. संजय दत्त का एके-47 मामला - 1993 में मुंबई में हुए बम विस्फोट कांड के दौरान एके-47 राइफल रखने के दोषी माने गए अभिनेता संजय दत्त का किया बचाव।
8. आसाराम दुष्कर्म मामला- नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी और जेल की सजा काट रहे आसाराम की तरफ से भी मुकदमा लड़ा ।
9. केजरीवाल मानहानि मामला- पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की तरफ से मानहानि के मुकदमे में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के लिए पैरवी की।
10. सोहराबुद्दीन हत्याकांड- सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ कांड में गुजरात के तत्कालीन और अब कें द्रीय गृहमंत्री अमित शाह की तरफ से अदालत में तर्क रखे।
11. इसके अलावा भी जेठमलानी ने हर्षद मेहता, केतन मेहता, ललित मोदी, कनिमोझी, बाबा रामदेव, अमित जोगी, हाजी मस्तान, सुब्रत राय सहारा, जयललिता जैसी चर्चित हस्तियों के मुकदमे लड़े।
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फाइल फोटो

जेठमलानी को श्रद्धांजलि

देश ने प्रतिष्ठित न्यायविद् और महान मेधा का व्यक्ति खो दिया।- रामनाथ कोविंद, राष्ट्रपति

उनके निधन से राष्ट्र ने एक प्रतिष्ठित न्यायविद्, एक महान बौद्धिक और देशभक्त खो दिया है।- वेंकेया नायडू, उपराष्ट्रपति

राम जेठमलानी के सबसे अच्छे पहलुओं में से एक उनके मन की बात कहने की क्षमता थी और उन्होंने बिना किसी डर के ऐसा किया।- नरेंद्र मोदी, पीएम

हम न केवल एक प्रतिष्ठित वकील को खो चुके हैं बल्कि वह एक महान व्यक्ति को भी, जो जीवंतता से भरा था।- अमित शाह, गृहमंत्री

जेठमलानी ज्ञान और बुद्धिमत्ता के पर्याय थे। उन्होंने विधि निर्माण और आम जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।- राजनाथ सिंह, रक्षामंत्री

हमने एक प्रिय दोस्त खो दिया।- सीताराम येचुरी, महासचिव माकपा

देश ने कानूनविद्, योग्य प्रशासक और बेहतर सांसद खो दिया।- मनमोहन सिंह, पूर्व पीएम

आपराधिक कानूनों की उनकी जानकारी किसी से मेल नहीं खाती। देश ने महान सपूत खो दिया।- कपिल सिब्बल, कांग्रेस नेता व वरिष्ठ वकील
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