पूर्व गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर लगे आरोपों के मामले में छात्रा के दोस्त की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। पूरा मामला ब्लैकमेलिंग पर आकर रुक गया है। इसके लिए एडीजी बरेली अविनाश चंद्र व डीआईजी राजेश पांडेय जैसे बड़े अधिकारियों के निर्देशन में जांच की जा रही है। जल्द ही स्थिति साफ होने की उम्मीद है।
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फाइल फोटो
स्वामी चिन्मयानंद पहले भी अपनी शिष्या को लेकर इसी तरह के आरोपों से घिर चुके हैं। तब भी आरोप प्रत्यारोप और ब्लैकमेलिंग जैसी बातें सामने आई थीं। स्वामी ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उनको ब्लैकमेल करने के लिए शिष्या से इस तरह के आरोप लगवाए जा रहे हैं।
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इस बार तो प्रकरण के शुरू में ही व्हाट्सएप के मेसेज से ब्लैकमेलिंग जैसी स्थिति सामने आ रही है। अगर छात्रा के दोस्त ने वास्तव में ऐसा किया तो इस बात की भी जांच करनी होगी कि उसके पास स्वामी की ऐसी कौन सी कमजोरी थी जिसकी वजह से वह इतनी बड़ी रकम मांग रहा था।
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- फोटो : सोशल मीडिया
स्वामी ने अभी चुप्पी साध रखी है। सुप्रीम कोर्ट में छात्रा के बयान और उनके आधार पर पुलिस की जांच से ब्लैकमेलिंग का सच जल्दी सामने आ सकता है। पुलिस छात्रा के दोस्त से भी पूछताछ करेगी। उसके मोबाइल का डाटा चेक किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो व्हाट्सएप मुख्यालय से मदद लेकर तकनीकी साक्ष्यों की पुष्टि की जाएगी।
आपको बता दें कि 24 अगस्त को शाम चार बजे फेसबुक पर छात्रा ने एक वीडियो वायरल किया था, जिसमें उसने आरोप लगाया था कि संत समाज का एक बड़ा नेता, जिसने कई लड़कियों की जिंदगी बर्बाद कर दी है, अब उसे व उसके परिवार को जान से मरवाने की धमकी दे रहा है। इसके अगले दिन परिवार वालों को छात्रा के लापता होने की जानकारी मिली तो पिता ने 25 अगस्त को शाम 4:20 बजे एसएस लॉ कॉलेज के प्रबंधक पूर्व गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद व अन्य पर बेटी का अपहरण करने व फेसबुक पर वायरल वीडियो के आधार पर दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए चौक कोतवाली पुलिस को तहरीर दी थी।