दिल्ली में आप ही आप और सूपड़ा साफ करने वाले
केजरीवाल की जिंदगी पर पूरा रिसर्च हो चुका है, लोग कहते नहीं अघाते की
छोटे कद का ये शर्मीला नौजवान अपनी जिंदगी में भी बेहद आम है, लेकिन इस आम
शख्सियत वाले केजरीवाल ने दिल्ली जीत के बाद सबके सामने अपनी जिंदगी का
सुनहरा पन्ना जब खोला तो लोग हैरान रह गए।
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कुछ यूं सुनीता की जिंदगी में आए अरविंद और छा गए
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ये पन्ना था अरविंद केजरीवाल- और सुनीता केजरीवाल की मुहब्बत का। एक-दूसरे के साथ और ताकत का। जब केजरीवाल जिद करते हुए पहली बार अपनी पत्नी सुनीता को सबको सामने लाए। अपनी जीत को सबके सामने उसी अंदाज में रखा जैसे आज का आम-आदमी रखता है। नौकरी में तरक्की होती है तो वो अपनी पत्नी और बच्चों को गले लगा लेता है। केजरीवाल ने भी वही किया बड़ी जीत से खुश और अंदर ही अंदर डर महसूस कर रहे केजरीवाल ने अपनी पत्नी को गले लगा लिया।
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केजरीवाल की जिंदगी का ये खूबसूरत पन्ने की ये पहली
सार्वजनिक तस्वीर है। अब हम आपको बताते हैं कि केजरीवाल की जिंदगी की हमसफर
उन्हें कैसे मिली और कैसे एक शर्मीले नौजवान आईआरएस में साथ पढ़ने वाली
लड़की को ही प्रपोज कर दिया।
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उनकी प्रेमिका यानि सुनीता ही उनकी जीवन संगिनी बनी। केजरीवाल और सुनीता की जोड़ी दिल्ली जीत के बाद मीडिया में छाई रही। केजरीवाल और सुनीता की जोड़ी को जिसने भी देखा सबने एक ही सुर में कहा 'दे आर मेड फॉर ईच अदर'।
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दोनों की मुहब्बत की दास्तां जब घरवालों के पास पहुंची तो वो बेहद खुश हुए। सुनीता को भी एक ऐसा जीवनसाथी मिल गया जिसकी उन्होंने हमेशा ख्वाहिश की थी। सुनीता चाहती थीं कि उनका पति ईमानदार और देश सेवा को प्राथमिकता देने वाला हो केजरीवाल उनकी जीवनसाथी की खासियतों को पूरा करते थे।
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उस वक्त सुनीता दिल्ली में रहती थीं। केजरीवाल हरियाणा के थे। दोनों ही एक ही जाति के थे तो घरवाले इस फैसले पर तुरंत राजी हो गए। आपको बता दें कि केजरीवाल भले ही स्पष्टवादी हों, लेकिन उन्हें अपने दिल की बात सुनीता के सामने रखने में काफी वक्त लग गया। 1994 में अरविंद और सुनीता की सगाई हो गई।
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चट मंगनी पट ब्याह वाली सूरतों में 1994 के साल में ही नवंबर के महीने में दोनों ने सादी कर ली। उस वक्त दोनों की ही ट्रेनिंग चल रही थी। 1995 में ट्रेनिंग पूरा करते ही दोनो दिल्ली आ गए और यहीं बस गए।
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शादी के एक साल बाद हर्षिता के रूप में बेटी का जन्म हुआ। 2001 में उनके घर में बेटे का जन्म हुआ, इसका नाम पुलकित रखा गया।
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अरविंद और सुनीता के दो बच्चे हैं। बेटी हर्षिता आईआईटी दिल्ली में पढ़ती है औ बेटा पुलकित स्कूल में पढ़ रहा है। अरविंद केजरीवाल और सुनीता दोनों ही एक सिक्के के दो पहलुओं की तरह हैं। दोनो की जिंदगी की प्रेमकहानी भी उसी आम आदमी की तरह ही है जिसका आज वो प्रतिनिधित्व करते हैं।
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देशसेवा को धर्म मानने वाले केजरीवाल ने आईआरएस की नौकरी छोड़ थी तो वहीं सुनीता अपनी नौकरी करती रहीं। उन्हें इस बात की खुशी थी कि उनके पति देशसेवा का काम कर रहे हैं।
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जहां केजरीवाल को जरूरत हुई उनकी जीवनसाथी हरदम उनके साथ खड़ी दिखाई दीं। घर में वो अकेले कमाने वाली हैं और केजरीवाल अपने काम में उसी जुनून के साथ जुटे हुए हैं।
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प्रोफेशनल जिंदगी में सादा मिजाज की सुनीता उस आम आदमी केजरीवाल की तरह ही एक आम औरत की छवि में नजर आती हैं। हालांकि केजरीवाल के सार्वजनिक जीवन में वो कभी नजर नहीं आईं और दोनों ही एक-दूसरे से अलग-अलग राहों पर चलते हुए एक-दूसरे का साथ निभा रहे हैं।
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सुनीता केजरीवाल के भी हजारों फॉलोअर हैं उन्हें पसंद करने वाले लोग हैं। जब केजरीवाल सुनीता को सबके सामने लेकर आए तो वो हाथ जोड़े सिर झुकाए एक आम औरत की छवि को पूरी कर रही थीं।
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एक ऐसी पत्नी की छवि जिसकी ख्वाहिश हर आम आदमी को होती है। ये एक ऐसी प्रेम कहानी है जो नई राजनीति में आए नए राजनेता की नई प्रेम कहानी के एक अलग ही अंदाज को बयां कर रही है।
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किस्से कई हैं राजनेताओं और उनकी पत्नीयों के जो अपने पति की राजनीति के साथ-साथ अपनी-अपनी प्रोफेशनल जिंदगी बिता रही हैं, लेकिन सुनीता केजरीवाल की कहानी इन सबसे अलग है। वो एक आम आदमी की पत्नी और आम औरत दिखाई देती हैं।