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'मिसाइल मैन' की एक झलक पाने के लिए हर शख्स था बेताब

Wed, 29 Jul 2015 11:01 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का पार्थिव शरीर जैसे ही दिल्ली पहुंचा तो देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से लेकर हर आम और खास शख्सियत ने उन्हें श्रृद्धांजलि अर्पित की।
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'मिसाइल मैन' की एक झलक पाने के लिए हर शख्स था बेताब

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मंगलवार दोपहर डॉ. कलाम का पार्थिव शरीर विशेष विमान से दिल्ली लाया गया। एयरपोर्ट से दोपहर करीब 2.15 बजे पार्थिव शरीर 10, राजाजी मार्ग स्थित उनके सरकारी आवास पहुंचा।
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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और पीएम मोदी ने जहां पहले पालम एयरपोर्ट पर डॉ. कलाम को श्रृद्धांजलि दी वहीं इसके बाद वे राजाजी आवास पर भी उन्हें श्रृद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे।

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डॉ कलाम को श्रृद्धांजलि देने के लिए राजनीति, विज्ञान, खेल और अन्य कई क्षेत्रों के दिग्गज उनके आवास पर पहुंचे।
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पालम एयरपोर्ट से राजाजी मार्ग पर उनके आवास तक आम जनता की भीड़ थी। हर कोई मिसाइल मैन कलाम को आखिरी सलाम करना चाहता था। सब डॉ. कलाम की एक झलक के लिए बेताब नजर आए।
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दोपहर के करीब दो बज रहे थे। बादलों से लुकाछिपी करते सूरज की तपिश तीखी थी। लुटियन दिल्ली के राजाजी मार्ग पर भारी भीड़ थी। हर उम्र, जाति व धर्म के लोग हरदिल अजीज शख्सियत मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के अंतिम दर्शन करने को बेचैन थे।
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उमस भरी गर्मी में सड़क पर स्कूली बच्चे भी मौजूद थे। अंदर जाने की इजाजत मिलने की उम्मीद में सबकी निगाहें मुख्य सड़क पर लगे बैरिकेड पर टिकी थीं। किसी को यकीन ही नहीं हो रहा था कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम अब उनके ही बीच नहीं रहे।

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पूरे रास्ते जगह-जगह स्कूली बच्चे अपने नेता के अंतिम दर्शन के लिए खड़े थे। बच्चों ने कलाम को अंतिम विदाई दी। उधर, 10 राजाजी मार्ग पर पहले वीवीआईपी लोगों ने पूर्व राष्ट्रपति के अंतिम दर्शन किए।

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वहीं, आम लोगों के लिए 3 बजे का समय था। लेकिन इससे काफी पहले ही लोग वहां पहुंचने लगे थे। इससे राजाजी मार्ग आम वाहनों के लिए बंद कर दिया गया। जबकि 10, राजाजी मार्ग से थोड़ा पहले आम लोगों के लिए बैरिकेड लगा दिया।

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3 बजते-बजते करीब एक किमी लंबी लाइन लग गई। इसमें बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे व युवा शामिल थे। गमगीन माहौल में खड़े लोग बीच-बीच में कलाम साहब अमर रहे के नारे भी लगाते रहे।
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वीवीआईपी लोगों के आने का सिलसिला रुकने के बाद करीब 4.10 बजे आम लोगों को अंदर जाने की इजाजत दी गई। उमस भरी गरमी में करीब एक घंटे की देरी के बावजूद किसी ने कोई शिकायत नहीं की। अपनी बारी आने के बाद ही लोगों ने नम आंखों से अपने प्रिय नेता के अंतिम दर्शन किए।
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