जो खुद एक साल से टूटा पड़ा हो वो भला क्या बदला लेगा? यह दर्द आरोपी पक्ष की महिलाओं की आंखों और जुबान पर था। पिछले साल अक्तूबर में सुनपेड़ गांव तब सुर्खियों में आया था, जब मोबाइल के विवाद में राजपूत परिवार के तीन लोग मारे गए थे। (सभी फोटो:अमर उजाला/फरीदाबाद)
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ये 10 तस्वीरें बयां कर रहीं सुनपेड़ गांव का दर्द, आप भी देखें
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इस घटना में मारे गए इंद्राज की पत्नी नीरज ने बताया कि घटना के बाद उनके घर में कमाने वाला भी कोई नहीं रहा। सालभर बाद पटरी से उतरी जिंदगी संभालने की कोशिश कर रहे थे कि 20 अक्तूबर की घटना ने फिर से तोड़कर रख दिया है।
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नीरज ने कहा कि घर में कमाने वाला भी कोई नहीं रहा है। तिहरे हत्याकांड का मामला कोर्ट में चल रहा है। अदालत जो फैसला देगी हमें मान्य होगा। उन्होंने बताया कि अब जब कोर्ट का फैसला आने वाला है तो जितेंद्र और उसके घरवालों ने षड्यंत्र रच डाला।
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मामला एक साल से शांत पड़ा था। ऐसे में मामले को बेवजह उलझाने के लिए यह कदम उठाया गया है। राजपूत परिवार के लोगों का कहना है कि उनके मन में बदला लेने जैसी कोई भावना नहीं थी।
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नहीं तो पिछले साल तीन मौतों के मामले में हुई एफआईआर में जितेंद्र का भी नाम लिखवा सकते थे। लेकिन उस समय जितेंद्र गांव में नहीं था, ऐसे में निर्दोष का नाम लिखवाना उचित नहीं था।
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सुनपेड़ गांव की घटना में जहां दलित समाज के पीड़ित ने अपने बच्चों को खोया है। वहीं आरोपी पक्ष के लोग भी अपने बच्चों से मिलने के लिए तड़प रहे हैं। घटना के बाद से आरोपी पक्ष के कुछ लोग गांव से बाहर हैं, जो अभी भी पुलिस गिरफ्त में नहीं आए हैं।
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खेतों में धान की फसल कटी पड़ी है। पुरुषों के घर पर न होने के कारण खेतों का काम रुका पड़ा है। खेतों में काम करने के लिए मजदूर भी नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में घर से लेकर बाजार तक का मोर्चा घर की महिलाओं ने संभाल लिया है।
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आरोपी पक्ष में एक व्यक्ति मामले को निपटाने के लिए सक्षम था, लेकिन पीड़ित पक्ष ने उसका नाम एफआईआर में लिखा दिया। पुलिस ने पीड़ित पक्ष की शिकायत पर एडवोकेट एदल सिंह को गिरफ्तार कर लिया है।
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ऐसे में थाने चौकी के अलावा खेतों और बाजार की जिम्मेदारी महिलाओं ने संभाल रखी है। एडवोकेट एदल सिंह की पत्नी राजबाला ने बताया कि उनकी शादी को 25 साल हो गए। लेकिन इतने सालों में कभी भी कोर्ट कचहरी की ओर कदम तक नहीं बढ़ाए।
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लेकिन अब इंसाफ के लिए थाने और कोर्ट के चक्कर काटने पड़ेंगे। उन्होंने बताया परिवार में उनके पति ही सबसे प्रभावशाली आदमी बचे थे। पेशे से वकील होने के कारण पाड़ित पक्ष को सबसे ज्यादा खतरा इन्हीं से था।