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पंखुड़ी ने पहले भी छोड़ी थी समाजवादी पार्टी, इन नेताओं पर जड़े थे ये गंभीर आरोप

Tue, 28 Aug 2018 09:37 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
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pankhudi pathak
समाजवादी पार्टी की मीडिया पैनलिस्ट की नई लिस्ट जारी होते ही पैनलिस्ट पंखुड़ी पाठक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सपा पर अपने समाजवादी सिद्धांतों को छोड़ देने का आरोप लगाया है। पंखुड़ी पाठक ने पहली बार इस्तीफा नहीं दिया हैं, उन्होंने पिछले साल भी विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद इस्तीफा दिया था। विधानसभा चुनाव के दौरान टीवी डिबेट और सोशल मीडिया में समाजवादी पार्टी के पक्ष में जोरदार अभियान चलाने वाली पंखुड़ी पाठक ने पिछले साल 29 अप्रैल को इस्तीफा दे दिया था। 
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pankhuri pathak
उन्होंने फेसबुक अपना इस्तीफा देने की जानकारी दी थी। पंखुड़ी ने उस वक्त भी फेसबुक पर पोस्ट कर पार्टी के नेताओं पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। पार्टी छोड़ने के बाद पंखुड़ी पाठक ने कहा था कि यह बेहद पीड़ादायक फैसला था। उन्होंने लिखा कि यह फैसला लेने मेरे लिए काफी कठिन था। उन्होंने लिखा कि पार्टी मेरे लिए परिवार की तरह थी, पार्टी के राष्ट्रीय अधयक्ष अखिलेश यादव के प्रति बहुत सम्मान है, अखिलेश यादव की तारीफ करते हुए लिखा कि वो वर्तमान में देश के सबसे अच्छे नेताओं में से एक हैं। 

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Pankhuri Pathak
उस समय लिखा था कि मैं पिछले सात सालों से समाजवादी पार्टी से जुड़ी थी। जब मैंने पार्टी की सदस्यता ली थी, उस समय मेरी उम्र 18 साल थी। इसके बाद उन्होंने पार्टी के कुछ नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए। पंखुड़ी ने अपने पोस्ट में लिखा कि 2017 विधानसभा चुनाव में हार के बाद विशेष समुदाय के लोग उन्हें टारगेट कर रहे हैं, कुछ लोग उनके खिलाफ अभियान चला रहे हैं। उन्होंने सीधा आरोप लगाते हुए लिखा कि इसके पीछे की वजह मेरी जाति और जेंडर (लिंग) है। 

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pankhudi pathak - फोटो : अमर उजाला
पंखुड़ी ने सीधा आरोप लगाते हुए लिखा कि कुछ ऐसे लोग जो सोचते हैं कि ब्राह्मण महिला पार्टी के लिए कलंक साबित हुई है। उन्होंने लिखा कि यादव सेना इंडिया के लोग उन्हें परेशान कर रहे थे और जातिगत टिप्पणियां कर रहे थे। काफी समय से इन लोगों को अनदेखा कर रहीं थी। लेकिन अब बहुत हुआ। साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि मैं देखूंगी ये लोग कितना पार्टी में सहयोग करते हैं। मैंने इसकी शिकायत पार्टी पदाधिकारियों से की थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 
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एक अन्य ट्वीट में पंखुड़ी ने लिखा कि 'मैं अपने पक्ष पर कायम हूं...जो जातिवादी हैं वो समाजवादी नहीं हो सकते। ये हमें पहचानना है कि कौन अपना है, कौन विरोधी।' उन्होंने कहा कि आज मेरे साथ ऐसा हो रहा है कल किसी और के साथ होगा। जब तक अन्य जातियों से कोई कार्रवाई नहीं की जाती है, तब तक पार्टी के ऊपर से भरोसा खोना जारी रहेगा। पंखुड़ी ने कहा कि ये फैसला उन्होंने महिलाओं के सम्मान के लिए लिया है। मैं अपनी सभी बहनों से कहना चाहती हूं कि वे मेरे इस फैसले से हतोत्साहित न हों। एक स्त्री के नाते हमें अपने सम्मान के लिए स्वयं लड़ना होगा। पंखुड़ी ने स्पष्ट किया कि वे किसी और पार्टी से जुड़ने नहीं जा रही हैं।
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उन्होंने लिखा कि 'मैं किसी अन्य पार्टी से जुड़ने के लिए पार्टी नहीं छोड़ रही हूं मैं भी यही समझती थी कि पार्टी को मेरी जरूरत है लेकिन शायद ऐसा है नहीं। 'पंखुड़ी पाठक ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम के बारे में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को सब पता है और वह आज भी उन्हें अपना आदर्श मानती हैं। वहीं ट्विटर पर भाजपा में शामिल होने के ट्रोल किए जाने पर पंखुड़ी करारा जवाब दिया और कहा कि वह देश छोड़ देंगी लेकिन भाजपा में शामिल नहीं होंगी। दिल्ली में रहने वाली 25 साल की पंखुड़ी पाठ का कोई पॉलिटिकल बैकग्राउंड नहीं है। चंद दिनों में ही दिल्ली की रहने वाली पंखुड़ी अखिलेश की फायर ब्रान्ड नेता बन गई थी। 
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- फोटो : सोशल मीडिया
उनके पिता जेसी पाठक और मां आरती पाठक डॉक्टर हैं और दिल्ली में ही प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं। पंखुड़ी का छोटा भाई चिराग पाठक अभी ग्रेजुएशन कर रहा है। स्टूडेन्ट लीडर पंखुड़ी पाठक लंबे समय से समाजवादी पार्टी की छात्र सभा से जुड़ी थीं। साल  2010 में हंसराज कॉलेज के चुनाव में उन्होंने ज्वाइंट सेक्रेटरी पद का चुनाव जीता। उस समय इनकी उम्र करीब 18 साल थी।  उन्होंने 2 से 3 साल तक पार्टी की तरफ से प्रत्याशियों को छात्रसंघ का चुनाव भी लड़ाया। दिल्ली में ये चर्चित छात्र नेता हैं। 
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