गोकुलपुर गांव स्थित झुग्गियां जलने से दर्जनों परिवारों के 150 लोग सड़क पर आ गए हैं। आग में उनका पूरा सामान जल चुका है। सिर्फ तन पर पहने हुए कपड़े बचे हैं। इनमें कई परिवार इतने टूटे चुके हैं कि दोबारा से अपनी गृहस्थी बसाने की चिंता उनके सिर से नहीं उतर रही है।
हालांकि, अस्थायी तौर पर दिल्ली सरकार की ओर से उनकी मदद के लिए राहत शिविर का बंदोबस्त किया गया है। उत्तर-पूर्वी जिलाधिकारी गीतिका शर्मा समेत जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों को देखते ही पीड़ितों का दर्द छलक उठा। किसी ने हाथ जोड़कर तो किसी ने पैर पड़कर मदद की गुहार लगाई। अफसरों ने पीड़ितों को राहत का आश्वासन देते हुए उनकी मदद का बंदोबस्त करना शुरू किया।
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fire in gokalpuri delhi
- फोटो : अमर उजाला
मेट्रो स्टेशन के पास बनाया राहत शिविर
जिलाधिकारी गीतिका शर्मा ने बताया कि मदद के तौर पर इलाके में ही एक अस्थायी कैंप बनाया गया है। शुरुआती तौर पर 33 झुग्गियां जलने की सूचना है, जिनमें 150 से अधिक परिवार रहते थे। पीड़ितों की मदद के लिए इलाके मेट्रो स्टेशन के पास 35 झुग्गियों का राहत शिविर बनाया गया है। इसमें रहने और खाने-पीने की व्यवस्था की गई है। साथ ही दो मोबाइल टॉयलेट वैन भी शिविर के पास मौजूद रहेगी। मौके पर मौजूद प्रशासनिक स्तर के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि जब तक पीड़ितों के रहने का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक प्रशासन पीड़ितों के रहने की व्यवस्था करेगा। इस संबंध में निगम से भी संपर्क किया जा रहा है, जिससे सामुदायिक केंद्र को राहत शिविर में बदला जा सके।
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नहीं थम रहे हैं आंसू
स्थानीय लोगों के मुताबिक, आसपास स्थित दो प्लॉटों में करीब 33 झुग्गियां जली हैं। इनमें दर्जनों परिवारों के 150 से अधिक लोग रहते थे। यह लोग आसपास अन्य किराए के घरों में बने शौचालयों पर निर्भर थे। हादसे के बाद से पीड़ित लोग सदमे में हैं। आशियाना उजड़ने के बाद उनके आंसू नहीं थम रहे हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
लोगों का आरोप देरी से पहुंचीं दमकल की टीमें
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि आग बुझाने के लिए दमकल विभाग की टीमें देरी से मौके पर पहुंची थीं। इस वजह से नुकसान का दायरा बढ़ता गया। स्थानीय निवासी श्याम कली के मुताबिक, आग लगने के कुछ मिनटों में ही दमकल विभाग को फोन कर दिया था, लेकिन काफी देर तक दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर नहीं थी। इस बीच स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर आग बुझाने का प्रयास जारी रखा। हालांकि, मौके पर मौजूद अधिकारियों का कहना था कि कॉल मिलने के कुछ मिनटों में ही दमकल विभाग की टीमें पहुंच गई थीं।
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पारा चढ़ने के साथ अग्नि हादसे बढ़े
राजधानी में पारा चढ़ने के साथ ही आग लगने की घटनाओं में तेजी से इजाफा हो जाता है। सर्दियों में औसतन आग लगने की लगभग 60 कॉल हर दिन आती हैं और गर्मियों में बढ़कर 120 से 130 के बीच हो जाती है। दमकल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, एक अप्रैल 2021 से 11 मार्च 2022 के बीच दिल्ली फायर सर्विस के पास कुल 26,672 कॉल आई। इसी अवधि के दौरान 46 लोगों की मौत हो गई, जबकि 373 लोग झुलस गए। अधिकारियों का कहना है कि इस साल मार्च की शुरुआत के साथ ही शायद कोई ऐसा दिन गया हो, जिस दिन कोई न कोई आग की बड़ी घटना न हुई हो।
आग फैलने के सभी सामान पहले से थे मौजूद
गोकुलपुर गांव के जिन झुग्गियों में सात जिंदगियां खत्म हुई हैं, वहां पहले से ही आग फैलने वाले सभी सामान मौजूद थे। यही वजह रही कि चंद मिनटों में ही आग धधक उठी और 33 झुग्गियां जल गईं। दमकल विभाग की टीमें शनिवार दोपहर तक राख को ठंडा करती नजर आईं। गोकुलपुर गांव के मुख्य रोड स्थित विभिन्न जगहों पर गत्ता और कबाड़ का काम होता है। इसे स्थानीय निवासी झुग्गियों में ही इकट्ठा कर उन्हें अलग-अलग कर बेचने का काम करते हैं। जहां आग लगी वहां पर भी कॉपी-किताबों की रद्दी और गत्ते का ढेर लगा था। कुछ झुग्गी वालों ने प्लास्टिक का सामान भी इकट्ठा कर रखा था। बारिश व धूप से बचने के लिए झुग्गियों के ऊपर प्लास्टिक की तिरपाल भी मौजूद थी। इस वजह से आग को तेजी से फैलने में मदद मिल गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि जिस समय झुग्गी के एक हिस्से में आग लगी तो पास में स्थित ऊंची इमारतों से लोगों ने पानी डाला, लेकिन ज्वलनशील सामग्री होने की वजह से लोग विफल रहे।