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Twin Towers: कांपी धरती, धूल के गुबार ने ढंका आसमान, लोगों के दिल भी पल भर के लिए दहल गए

Mon, 29 Aug 2022 05:32 AM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नोएडा
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कई मीटर तक फैला मलबे का गुबार - फोटो : अमर उजाला
ट्विन टावर के वो 12 सेकेंड.... इस बीच धमाके से धरती कांप गई और धूल के गुबार ने आसमान को ढंक लिया। इतिहास दर्ज करने जा रहे इस पल को देखने के लिए जुटे लोगों के पल भर के लिए दिल भी दहल गए। जी हां, नोएडा के बहुचर्चित और भ्रष्टाचार के प्रतीक ट्विन टावर धराशायी होने के दौरान यही नजारा रहा।

कुतुब मीनार से भी ऊंचा ट्विन टावर 12 सेकेंडों में ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। 32 मंजिला एपेक्स और 29 मंजिला सियान टावर जहां खड़े थे, वहीं ढह गए। एक के बाद एक कई धमाकों से करीब 100 मीटर के दायरे में 50 मीटर से भी ज्यादा ऊंचा धूल का गुबार उठा। इससे करीब दस मिनट तक ट्विन टावर की नजदीकी इमारतें नजरों से ओझल रहीं। अनुमान है कि धमाके का कंपन 25 से 30 मिमी प्रति सेकंड का रहा।
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ट्विन टावर हुआ ध्वस्त - फोटो : अमर उजाला
ट्विन टावर को सुरक्षित तरीके से ध्वस्त करने के लिए प्रशासन ने पुख्ता तैयारियां की थीं। वाइब्रेशन (कंपन) मापने के लिए एडिफिस कंपनी ने दस और सीबीआरआई की तरफ से दस मशीनें लगाई थीं। रविवार शाम तक मलबे के ढेर से तीन-चार मशीनों को निकाल लिया गया था। बाकी मशीनों की तलाश सोमवार को की जाएगी। सभी के आंकड़े मिलने के बाद ही कंपनी कंपन का सटीक आंकड़ा दे सकेगी, लेकिन ट्विन टावर के 200 से 300 मीटर के दायरे में 25 से 30 एमएम के कंपन का अंदाजा इंजीनियरों ने लगाया है।
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ट्विन टावर का मलबा साफ किया जा रहा है। - फोटो : अमर उजाला
बिजली कड़कने जैसी आवाज के साथ जैसे ही इमारतें धराशायी हुईं, इसके बेहद नजदीक एमराल्ड कोर्ट, एटीएस और पार्श्वनाथ सोसाइटी की इमारतें कांप उठीं। एमराल्ड और एटीएस सोसाइटी के फ्लैट खाली करा लिए गए थे, लेकिन पार्श्वनाथ सोसाइटी में लोग धरती हिलते ही सहम उठे। ट्विन टावर के सौ मीटर के दायरे में विस्फोटकों की गंध और करीब एक घंटे तक प्रदूषण का स्तर बढ़ने से वहां मौजूद लोगों को परेशानी उठानी पड़ी।

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ट्विन टावर - फोटो : अमर उजाला

धमाके से नहीं, इमारत गिरने से कंपन

टावर ध्वस्त करने वाली एडिफिस कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि भूकंप के लिहाज से नोएडा सेस्मिक जोन-5 में आता है। आमतौर पर यहां भूकंप की गति रिक्टर स्केल के पैमाने पर चार के आसपास रही है। मतलब 300 से 400 मिमी प्रति सेकंड का कंपन हुआ है। इस लिहाज से 25 मिमी का कंपन होने से इमारतें सुरक्षित हैं। ट्विन टावर गिरने से इससे 12 से 16 गुना कम होने का अनुमान है। एडिफिस के पार्टनल जिगर छेदा ने बताया, धमाकों से नहीं, बल्कि इमारतों के जमीन पर गिरने से कंपन की स्थिति पैदा हुई।
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ट्विन टावर का मलवा - फोटो : अमर उजाला

एक घंटे तक विस्फोटकों की जांच

ट्विन टावर गिरने के बाद सबसे बड़ी चुनौती जिंदा विस्फोटकों को तलाशने की थी। करीब आधे घंटे बाद एडिफिस और उसकी सहयोगी कंपनी जेट डिमोलिशन के एक्सपर्ट मलबे के ढ़ेर के पास पहुंचे। शाम चार बजे तक विस्फोटकों की तलाश के बाद सुरक्षित डिमोलिशन की जानकारी दी गई। हालांकि, निवासियों को पांच बजे के बाद ही अपने घर लौटने की अनुमति दी गई थी, लेकिन प्राधिकरण ने सफाई व्यवस्था के चलते रात 9 बजे से पहले सोसाइटी की एंट्री खोलने के इंकार कर दिया।
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ट्विन टावर से करीब एक किलोमीटर दूर से लोगों ने कार्रवाई देखी। - फोटो : अमर उजाला

रातभर घर नहीं लौटे निवासी

एमराल्ड कोर्ट और एटीएस सोसाइटी को पूरी तरह खाली करा लिया गया था। यहां के पांच हजार से ज्यादा निवासी शनिवार शाम और रविवार सवेरे ही अपने घरों पर ताला लगाकर जा चुके थे। टावर ध्वस्त होने के बाद शाम पांच बजे बिजली आपूर्ति सही कर दी गई। रात नौ बजे से लोगों को घर लौटने की अनुमति दी जा चुकी थी, 90 फीसदी निवासियों ने घर से बाहर रहना ही मुनासिब समझा।

टाइम लाइन

  • सुबह 7:00 बजे : लोगों को टावर से निकालने का काम चला
  • सुबह 7:15 बजे : आसपास की सभी सोसाइटियों में ढोल बजे
  • सुबह 7:30 बजे : डायवर्जन व्यवस्था हुई लागू
  • सुबह 7:45 बजे : पानी के टैंकरों को टावर के पास खड़ा किया
  • सुबह 8:45 बजे : एटीएस और एमराल्ड सोसाइटी हुई खाली
  • सुबह 8:55 बजे : गेल पाइपलाइन के इमरजेंसी वाहन पहुंचे
  • सुबह 9:55 बजे : एडिफिस के सभी इंजीनियर बस से पहुंचे
  • दोपहर 1:00 बजे : बिजली व गैस की पाइपलाइन की आपूर्ति रोकी
  • दोपहर 2:00 बजे : पहला सायरन बजा
  • दोपहर 2:15 बजे : सोसाइटियों के लोग छतों पर जुटे। दूसरा सायरन बजा
  • दोपहर 2:28 बजे : तीसरा सायरन बजा
  • दोपहर 2:31 बजे : ट्विन टावर ब्लास्ट। आसपास की सोसाइटियों में फैली धूल
  • दोपहर 3:15 बजे : धुंध साफ हुई
  • दोपहर 3:30 बजे : लोगों ने मिठाई बांटी और ढोल बजे
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ट्विन टावर हुआ ध्वस्त - फोटो : अमर उजाला

100 मीटर दूर ट्रिगर दबाकर किया धमाका

ट्विन टावर को गिराने के लिए विस्फोटक लगाकर तार जोड़े गए थे। दोनों टावरों से जोड़ने के बाद एक मुख्य तार निकाला गया, जो 100 मीटर दूर तक ले जाया गया। यहां पर इसे एक मशीन से जोड़ा गया, जो ब्लैक बॉक्स कहा जाता है। इस ब्लैक बॉक्स को घुमाने पर यह चार्ज हुआ और मशीन का लाल बटन जल गया। इसके बाद हरे बटन को दबाने के बाद ट्विन टावर में विस्फोट हो गया।

यह है टावरों का आंकड़ा

एमराल्ड कोर्ट के ट्विन टावर में 915 फ्लैट और 21 दुकानें थीं। दोनों टावरों के 20 फ्लोर पर प्राइमरी ब्लास्ट किया गया। इसमें बी-1, 2, 6, 10, 14, 18, 22, 26 और 32 तल शामिल रहे। दोनों टावरों के आठ फ्लोर पर सेकेंड्री ब्लास्ट किया गया। इसमें 4, 8, 12, 16, 20, 24, 28 और 30 तल शामिल रहे।

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ट्विन टावर गिरने के बाद कुछ यूं रहा माहौल - फोटो : अमर उजाला
सुपरटेक ने कहा- 500 करोड़ का हुआ नुकसान
सुपरटेक के चेयरमैन आरके अरोड़ा ने बताया कि ट्विन टावर गिरने से 500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसमें 3700 किलोग्राम विस्फोटक के लिए 20 करोड़ रुपये की लागत आई। इसके अलावा जमीन खरीद, निर्माण की लागत, प्राधिकरण से कई मामलों में मंजूरी लेने में फीस, बैंकों को दिया गया ब्याज और दोनों टावरों के खरीदारों को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाई गई राशि भी शामिल है। साथ ही, जो टावर गिराए गए, उसके 900 फ्लैटों की वर्तमान बाजार दर 700 करोड़ थी। इसका कुल बिल्टअप एरिया आठ लाख वर्गमीटर में था। ट्विन टावर का निर्माण प्राधिकरण के नियमों के तहत किया गया था। इसके अलावा सुपरटेक की ओर से एडिफिस इंजीनियरिंग को 17.5 करोड़ रुपये गिराने के लिए दिए गए। इसके अलावा 100 करोड़ का बीमा कराया गया था। इसका प्रीमियम भी भरा गया।
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जमींदोज हुआ ट्विन टावर - फोटो : अमर उजाला
एटीएस विलेज की 10 मीटर लंबी दीवार क्षतिग्रस्त
नोएडा। ट्विन टावर में धमाका होते ही एटीएस विलेज की 10 मीटर लंबी दीवार क्षतिग्रस्त हो गई। साथ ही, कई फ्लैटों के कांच टूट गए। अब नुकसान की भरपाई एडिफिस इंजीनियरिंग करेगी। वहीं, एमरॉल्ड कोर्ट सोसाइटी में कोई नुकसान नहीं हुआ। विस्फोट के बाद एडिफिस इंजीनियरिंग, प्राधिकरण समेत दूसरी एजेंसियों ने पूरे एमराल्ड कोर्ट और एटीएस विलेज परिसर की जांच की। इसका मकसद नुकसान का पता लगाना था।

निरीक्षण के दौरान एटीएस विलेज की दीवार क्षतिग्रस्त पाई गई। इसके अलावा फाइकस के पेड़ भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए। अधिकारियों का कहना है कि ट्विन टावर का ध्वस्तीकरण पूरी तरह से सुरक्षित रहा। इस तरह के नुकसान के आकलन पहले से ही किए गए थे। हालांकि, कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। सबसे खास बात यह है एमराल्ड कोर्ट का एस्टर-2 केवल 9 मीटर की दूरी पर था, लेकिन उसे किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ।
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