ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में हुए दर्दनाक हादसे के बाद पिता का दर्ज फूट पड़ा। सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता के पिता राज कुमार मेहता ने बताया कि करीब 12 बजे पुत्र का फोन आया था। पुत्र ने कहा कि वह नाले में गिर गया उसे बचाओ आकर। लेकिन मैं बचा नहीं पाया। मैं बेबस देखता रहा।
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 टी प्वाइंट के पास बेसमेंट के लिए बने गड्ढे में भरे पानी में कार समेत डूबे सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। रविवार को सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पिता की शिकायत पर दो बिल्डर कंपनी एमजे विशटाउन व लोटस ग्रीन खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पुलिस ने राजकुमार मेहता की शिकायत पर बिल्डर के खिलाफ बीएनएस की धारा-105 (गैर इरादतन हत्या), 106 (1) (किसी व्यक्ति के द्वारा की गई लापरवाही या जल्दबाजी से किसी व्यक्ति की मृत्यु, धारा-125 (मानव जीवन या दूसरों की व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने) की धाराओं में केस दर्ज किया है।
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नोएडा के सेक्टर-150 में हुए हादसे में टूटी पड़ी नाले की दीवार
- फोटो : अमर उजाला
'करीब 12 बजे बेटे का फोन आया था'
मामले में प्राधिकरण की मिट्टी का ढेर लगवाने के साथ लोहे की 10 फीट चौड़ी और सात फीट ऊंची बैरिकेड लगवाने के साथ जर्सी बैरियर रखवाए गए हैं। सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता के पिता राज कुमार मेहता ने बताया कि करीब 12 बजे पुत्र का फोन आया था।
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नोएडा के सेक्टर-150 में हुई कार दुर्घटना के बाद मौके पर जुटी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
करीब 30 मिनट वह घटना स्थल को तलाशा
पुत्र ने कहा कि वह नाले में गिर गया उसे बचाओ आकर। पहले वह ऐस सिटी नाले के पास पहुंचे और वहां देखा तो कुछ नहीं मिला। करीब 30 मिनट वह घटना स्थल को तलाशते रहे। जब वह घटना स्थल को तलाशते हुए पहुंचे तो देखा कि पुत्र कार की छत पर लेटा हुआ है।
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नोएडा के सेक्टर-150 में दुर्घटना ग्रस्त कार सवार को निकालने के लिए जाती एसडीआरएफ की टीम
- फोटो : अमर उजाला
पहले रस्सी फेंककर ही बचाव का प्रयास किया
इस दौरान डायल-112 पर पुलिस को सूचना दी। पुत्र बीच-बीच में बचाओ-बचाओ की आवाज लगा रहा था। इस दौरान उन्होंने टार्च जलाकर अपने जिंदा होने का भी सबूत दिया। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और दमकल के कर्मियों ने पहले रस्सी फेंककर ही बचाव का प्रयास किया। मगर रस्सी उस तक नहीं पहुंची। जो क्रेन भी मंगवाई गई वह भी उस तक नहीं पहुंच गई।
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नोएडा के सेक्टर-150 में हुए हादसे के बाद घटना स्थल पर लगाए गए बैरियर
- फोटो : अमर उजाला
कोई गोताखोर भी नहीं पहुंचा और...
जिस कारण राहत बचाव कार्य में देरी हुई। मौके पर कोई गोताखोर भी नहीं पहुंचा और बेटा उनकी आंखों के सामने ही कार समेत डूब गया। बाद में सफलता नहीं मिलते देख एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के जवानों को बुलाया गया। कई घंटे के सर्च ऑपरेशन के बाद उन्होंने पुत्र को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
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नोएडा के सेक्टर -150 स्थित गड्ढे में जहां कार गिरी थी उसके दूसरी तरफ भी नहीं है कोई बैरिकेड
- फोटो : अमर उजाला
पहले भी हुआ था यहीं पर हादसा
जिस जगह पर हादसा हुआ है। वहां पहले भी एक ट्रक कोहरे के कारण फंस चुका था। बावजूद उस हादसे से सबक नहीं लिया गया। जिस बेसमेंट में हादसे हुआ है। वहां हमेशा ही पानी भरा रहता है। ट्रक हादसे की घटना के बाद उसे दूर करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। घटना स्थल के पास नाला भी खुला हुआ है। वहां कोई रिफ्लेक्टर और बैरिकेड भी नहीं था।
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इंजीनियर युवराज की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
निवासियों ने निकाला कैंडल मार्च, कार्रवाई की मांग
सेक्टर-150 स्थित सोसाइटी निवासियों ने युवराज को श्रद्धांजलि देने के लिए कैंडल मार्च निकाला। उन्होंने हादसे पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की। रविवार को टाटा यूरेका पार्क समेत आसपास की अन्य सोसाइटियों के निवासियों ने हादसे पर दुख जताया है। उन्होंने युवराज के परिजनों को ढांढस जताया। साथ ही युवराज को न्याय दिलाने के लिए लगातार अभियान चलाने की बात कही।
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इंजीनियर युवराज के पिता का दर्द
- फोटो : अमर उजाला
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में डूबने के बाद दम घुटने से हुई मौत
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण पानी में डूबने से दम घुटना बताया गया है। घटना के कारण उसे कार्डियक अरेस्ट भी हुआ था। लंबे समय तक ठंडे पानी में फंसे रहने और ऑक्सीजन की कमी के कारण हृदय गति रुक गई। जिससे इंजीनियर की मौत हो गई।
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इंजीनियर युवराज की फाइल फोटो और पिता
- फोटो : अमर उजाला
जांच में पता चला है कि बेसमेंट में गिरने के बाद कार पानी में तैरती रही। युवराज किसी तरह बाहर कार की छत पर बैठ गए। कार के अंदर शीशे से पानी जाने लगा। वजन अधिक होने के कारण इंजीनियर कार सहित धीरे-धीरे डूब गया। युवक का मोबाइल फोन बरामद नहीं हो सका है। वहीं कार को भी नहीं निकाला जा सका है।
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सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत
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क्या है मामला
ग्रैंडियोस के समीप टी प्वाइंट के पास शुक्रवार देर रात एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होने के बाद गहरे नाले की दीवार तोड़ते हुए पानी से भरे बेसमेंट में करीब 70 फीट दूर जा गिरी थी। नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस, दमकल टीम, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ की टीम ने कई घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 30 फीट गहरे पानी से युवक को निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया था। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था।
घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस द्वारा, फायर ब्रिगेड को जोड़कर उनके लेडर, क्रेन, सर्च लाइट, बोट के जरिये उसे बचाने काप्रयास किया। फाइनल ऑपरेशन में एनडीआरएफ को जोड़ा गया। मगर न्यूनतम दृश्यता शून्य के कारण परेशानी हुई। घटना के संबंध में पीड़ित परिवार की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की है। जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।-डॉ राजीव नारायण मिश्र, अपर पुलिस आयुक्त, कानून एवं व्यवस्था, गौतमबुद्धनगर