बहुचर्चित निठारी कांड में सीबीआई की विशेष अदालत ने शनिवार को हत्या के 12वें मामले में सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुना दी है। इस बारे में अमर उजाला संवाददाता ने नोएडा में पीड़ितों से बातचीत की तो उन्होंने इस मामले में मोनिंदर सिंह पंढेर के बरी होने पर नाराजगी जताई।
विज्ञापन
2 of 6
nithari case
- फोटो : अमर उजाला
निठारी में 10 साल की बच्ची को खोने वाले एक पीड़ित पिता का आरोप है कि पंढेर सिस्टम के लचीलेपन का लाभ उठाकर बच रहा है। जबकि असली कातिल वही है और मानव अंगों की तस्करी कराता था। जब उनके पास कपड़े धुलने के लिए आते थे तो कुछ पर खून के धब्बे लगे होते थे।
विज्ञापन
3 of 6
nithari case
- फोटो : अमर उजाला
इस बारे में कोली से पूछने पर वह बताता था कि साहब पंढेर मुर्गे को स्वयं हलाल करके बनवाते हैं। उसी का खून है। उनको नहीं पता था कि बेटी के खून से सने कपड़े भी स्वयं धोए हैं। एक-दो नहीं, बल्कि कई बार ऐसा हुआ है जब डी-5 कोठी से खून से सने कपडे़ आते थे, लेकिन हर बार कोली का यही जवाब होता था।
4 of 6
पंधेर की कोठी
- फोटो : राजन राय/अमर उजाला
पीड़ित पिता ने बताया कि जिस दिन बेटी गायब हुई थी, वह कपड़ों पर प्रेस कर रहे थे और बच्ची भी आसपास ही खेल रही थी, लेकिन जब उसका कई दिन तक कोई सुराग नहीं लगा तो पुलिस के पास गए थे। पुलिस ने उनकी फरियाद को हल्के में लिया।
विज्ञापन
5 of 6
nithari
कोली को हर मामले में फांसी की सजा हो रही है, लेकिन पंढेर हर बार बच रहा है। उनकी बेटी 2004 में गायब हुई थी। 19 माह तक बेटी की तलाश की और 12 साल में नोएडा आकर जो कमाया था वह सब तलाश में चला गया।
पुलिस की पैंतरेबाजी से फांसी से बच रहा पंढेर
पीड़ित परिजनों का आरोप है कि एक शिकायत के आधार पर देर रात को पुलिस पंढेर और कोली को साथ लेकर गई थी। सुबह देर तक जब कोई व्यक्ति डी-5 में नहीं आया तो वह आसपास के चार-पांच लोगों के साथ दीवार फांदकर कोठी में घुस गए थे। उन्होंने 96 खोपड़ियां व कंकाल सेक्टर-49 पुलिस को गिनवाए थे, लेकिन पुलिस ने लोगों को डरा धमकाकर केवल 19 मामलों में ही रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्हें अदालत की शरण में जाकर रिपोर्ट दर्ज करानी पड़ी थी। पंढेर के फांसी की सजा से बचने का कारण पुलिस की पैंतरेबाजी है।