पिछले एक साल में भारत में जिस्मफरोशी के धंधे में 25% का इजाफा हुआ है और इसका कारण बना है इंटरनेट जहां लड़कियों को फंसाने के लिए नए तरीके इजाद किए गए हैं।
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दक्षिणी दिल्ली को राजधानी के सबसे पॉश इलाकों में से एक माना जाता है। झारखंड के दर्जनभर से ज्यादा युवाओं को जब यहां के एक होटल में नौकरी के लिए ऑफर मिला तो वो चौंक गए। हालांकि जांच के बाद जो खुलासा हुआ उसने पुलिस को भी सकते में डाल दिया। जानकारों के मुताबिक पिछले कुछ समय से भारत के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में इंटरनेट और स्मार्ट फोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है जिसका इस्तेमाल करने वाले युवा लड़के-लड़कियां हैं।
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ग्रामीण इलाकों में फेसबुक और वाट्सऐप जैसी सोशल साइट्स पर सक्रिय युवाओं की पहली जरूरत रोजगार होती है और बड़े शहरों का आकर्षण उन्हें जाल में फंसाने का सबसे आसान तरीका होता है।
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इंटरनेट के माध्यम से ग्रामीण युवाओं की इसी कमजोरी का फायदा उठाया जा रहा है और उन्हें जाल में फंस के जिस्मफरोशी और वेश्यावृत्ति के धंधे में ढकेला जा रहा है।
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दिल्ली एयरपोर्ट पर पकड़ी गई नागालैंड की 17 साल की युवती ने बताया कि उसने फेसबुक पर एक व्यक्ति से दोस्ती की जिसके बाद उससे बातचीत बढ़ने लगी। उसने नौकरी का लालच देकर उसे दिल्ली बुलाया और यहां से वह जिस्मफरोशी के धंधे में धकेलने का प्लान तैयार कर रहा था।
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जानकार बताते हैं कि सेक्स की तलाश करने वालों के लिए सोशल मीडिया ऐसी जगह हैं जहां पुलिस की नजर से बचते हुए ऐसी लड़कियों को शिकार बनाया जा सकता है जो नौकरी की तलाश कर रही हैं।
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एक सरकारी आंकड़े के मुताबिक 2016 में मानव देह व्यापार में 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है और इस मामले में सबसे ज्यादा मामले पश्चिम बंगाल में मिले हैं।
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जानकारों का कहना है कि पहले जिस्मफरोशी और मानवतस्करी के धंधों में लड़कियों को फंसाने के लिए उन तक सीधे पहुंचना जरूरी था लेकिन इंटरनेट ऐसे जाल की तरह सामने आया है जिसके माध्यम से देश-दुनिया के किसी भी कोने से शिकार को लालच देकर आसानी से शिकार बनाया जा सकता है।
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युवाओं में लोकप्रिय हो चुका इंटरनेट पर सबसे ज्यादा तीन चीजों की तलाश होती है जिसमें पैसे कमाने के रास्ते, शादी के लिए वर-वधू और नौकरी है।
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चौंका देने वाली बात ये है कि देश की राजधानी दिल्ली ही मानव तस्करी और देह व्यापार के सबसे बड़े चौराहे के तौर पर सामने आई है। इस पेशे में पूर्वोत्तर, झारखंड, बंगाल और उड़ीसा के युवाओं को इंटरनेट के माध्यम से आसानी से गरीब और अभावग्रस्त नाबालिग लोगों को शिकार बनाया जा रहा है।
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इंटरनेट के माध्यम से शिकार बनाए गए ज्यादातर नाबालिगों को या तो जिस्मफरोशी या फिर दुकानों, घरों और फैक्ट्रियों में बंधुआ मजदूर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। शिकार बनाए गए नाबालिगों को बड़ी संख्या में खाड़ी देशों में भी भेजा जाता है।
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जबकि नॉर्थ-ईस्ट से लाई गई नाबालिग लड़कियों को स्पा, डांस बार जैसी जगहों पर धकेल दिया जाता है जहां इस काम की आड़ में जिस्फरोशी का धंधा चलाया जाता है।
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जानकारों का मानना है कि पहले इस तरह के काले धंधों में लगे लोगों को गांव में जाकर नाबालिग लड़के-लड़कियों के परिजनों को संतुष्ट करना पड़ता था ताकी उन्हें शहर लाकर इन धंधों में लगाया जा सके लेकिन इंटरनेट के आने के बाद से उनका काम आसान हो गया है और अब वो सीधे इन्हें शिकार बना रहे हैं।
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दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के मुताबिक ये लोग इंटरनेट पर खुद को ग्लोबल इंटरप्रेन्योर और रिक्रुटर्स के तौर पर पेश करते हैं और अच्छी सैलरी के नाम ग्रामीण लड़के-लड़कियों को शिकार बनाते हैं।
पहले ये लोगों आर्थिक तौर पर पिछड़े इलाकों की रेकी करते हैं और वहां से मोबालइ नंबरों का जमा कर समूह में मैसेज भेजते हैं और जैसे ही कोई उन्हें जवाब देता है उसे फंसाने के लिए काम शुरु कर देते हैं।