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सुसाइड मिस्ट्री: नहीं जा रही थी 1 महीने से स्कूल

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सायरा ने सुसाइड क्यों किया? न स्कूल फ्रेंड्स जानते हैं, न कोच और न पुलिस। फैमिली भी अनजान है। हालांकि सायरा के पिता जयदीप का कहना है कि सायरा करीब सवा महीने स्कूल नहीं जा रही थी, क्योंकि स्कूल ने करीब 45 हजार रुपये ट्रांसपोर्टेशन चार्ज लगा दिया था। जबकि पहले कभी कोई फीस उनसे नहीं ली गई थी। उन्होंने मैनेजमेंट से कहा था कि वह बाद में तय करेंगे कि चार्ज दे पाएंगे या नहीं।
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सुसाइड मिस्ट्री: नहीं जा रही थी 1 महीने से स्कूल

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बकौल जयदीप, एक सप्ताह पहले मैनेजमेंट ने उनसे संपर्क किया था कि सायरा की फीस माफ कर दी गई है, उसके एग्जाम करा दीजिए। तब सायरा स्कूल गई थी। जयदीप ने बताया कि सायरा ने सुसाइड क्यों किया, यह तो नहीं पता। सारा घर खंगाल लिया, सुसाइड नोट भी नहीं मिला है। उसने यह कदम बिना किसी वजह तो नहीं उठाया होगा, हो सकता है किसी वजह से डिप्रेशन में हो, मगर वह वजह क्या है, उसका अभी पता नहीं, वह अपने स्तर से भी पता कर रहे हैं कि उसने ऐसा क्यों किया।
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दूसरी तरफ, स्कूल मैनेजमेंट का कहना है कि पांचवीं क्लास से सायरा से फीस नहीं ली जा रही थी। दसवीं के बाद 11वीं पैटर्न बदला था, इस वजह से चार्ज लग गया था और नोटिस इनके घर चला गया था। जिसे जानकारी के बाद माफ कर दिया गया था। वैसे भी सायरा को होनहार होने की वजह से छूट थी कि वह बाद में अपने एग्जाम दे सकती थी। सायरा ने स्कूल बैग पर पैर रखकर शॉल से फंदा लगाया था। परिजनों को स्कूल बैग फर्श पर पड़ा मिला था।

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सायरा केपरिजनों का दावा है कि वह मोबाइल इस्तेमाल नहीं करती थीं। माता-पिता के मोबाइल का इस्तेमाल ही दोस्तों और कोच से बातचीत करने के लिए करती थीं। उसने मां का मोबाइल बड़ी बहन से बात करने के लिए लिया था लेकिन बात नहीं हुई थी। इसके बाद उसने मोबाइल पर गेम भी खेला था। सायरा के कोच राजू भी बेहद दुखी हैं। उन्होंने बताया कि वह सायरा को सात-आठ साल से ट्रेनिंग दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि सायरा ने उनसे कहा था कि वह अब प्रैक्टिस करने नहीं आ पाएगी, क्योंकि एग्जाम की तैयारी करनी है। उनकी रविवार शाम भी सायरा से बात हुई थी। वह सामान्य थी। रात करीब दो ढाई बजे सायरा के पिता ने उन्हें फोन करके उसकी आत्महत्या की जानकारी दी। वह इस कदर आहत हैं कि अब किसी को ट्रेनिंग नहीं देना चाहते हैं।
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सायरा को तैराकी के लिए बाहर जाना पड़ता था। उसकी देखरेख और स्वीमिंग में बेहतर कर सके, इसलिए उसके पिता जयदीप ने तीन साल पहले वीआरएस ले लिया था। उस वक्त वह बागपत में हेड कांस्टेबल थे। सायरा सिरोही ने आठ साल की उम्र में जल परी की ख्याति हासिल कर ली थी। सायरा ने डीडीपीएस गोविंदपुरम के स्वीमिंग पूल में लगातार 16.35 घंटे में 38 किलोमीटर स्वीमिंग कर राष्ट्रीय लेवल पर ख्याति हासिल की थी। सीबीएसई नेशनल स्वीमिंग और यूपी स्टेट रिकॉर्ड होल्डर सायरा सिरोही का ओलंपिक में मेडल जीतने का सपना अधूरा रह गया। परिजनों को कहना है कि इसके लिए सायरा जी जान से मेहनत कर रही थी।
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डीपीएसजी मेरठ रोड की होनहार खिलाड़ी सायरा सिरोही की प्रतिभा और उसकी नेशनल लेवल की प्रतियोगिताओं को देखते हुए क्लासेज के साथ एग्जाम में भी रियायत दी गई थी। उसके अधिकांश एग्जाम बाद में कराए जाते थे। पांचवीं क्लास से 11वीं क्लास तक उसने अपने प्रतिभा का प्रदर्शन कर सैकड़ों मेडल जीते। सायरा का अधिकांश वक्त देशभर में होने वाली स्वीमिंग प्रतियोगिताओं और प्रैक्टिस में बीतता था। 10वीं में सायरा ने 6.4 सीजीपीए ग्रेडिंग प्वॉइंट्स हासिल किए थे।
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सीबीएसई नेशनल स्वीमिंग में नए रिकॉर्ड के साथ तीन गोल्ड जीतने वाली सायरा सिरोही को डीपीएसजी मेरठ रोड स्कूल प्रबंधन की ओर से 26 जनवरी पर सम्मानित किया जाना था। सायरा की मौत के बाद प्रबंधन ने पुरस्कार वितरण समारोह रद्द कर दिया है। सोमवार को स्कूल में असेंबली में मौन रखा गया। सायरा को क्या दर्द था, यह उसने कहीं तो बयां किया होगा। डायरी में, लैपटॉप पर या फिर किसी फ्रेंड से। मगर फिलहाल ऐसा कुछ भी और कोई भी नहीं है, जिससे यह पता लग सके कि उसने ऐसा क्यों किया।

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‘मैम’ मैं ओलंपिक में देश के लिए मेडल जरूरी जीतूंगी। खुशमिजाज नेशनल स्वीमर सायरा सिरोही की बातें याद कर डीपीसजी मेरठ रोड की प्रिंसिपल ज्योति गुप्ता भावुक हो उठीं। रुंधे गले से कहा कि सालों से खबरों में छायी रहने वाली ‘जल परी की कल आखिरी न्यूज आएगी’। नेशनल स्वीमिंग में गोल्डन गर्ल्स नाम से मशहूर सायरा सिरोही की मौत ने शिक्षकों, प्रिंसिपल, स्कूल स्टाफ सहित छात्र-छात्राएं स्तब्ध हैं। डीपीएसजी की प्रिंसिपल ने कहा कि हमेशा चहकते रहने वाली होनहार खिलाड़ी सायरा की आत्महत्या झकझोर कर देने वाली है। पांचवीं क्लास से डीपीएसजी में पढ़ाई की शुरुआत करने वाली सायरा ने देशभर में अपनी प्रतिभा से शहर और स्कूल का नाम रोशन किया।

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न्यूज में सायरा सिरोही हमेशा छाए रहती थीं। हर महीने कोई न कोई नई उपलब्धि उसके नाम होती थी। स्कूल में तो उसकी उपलब्धियों का पूरा डाटा एकत्रित है। स्कूल और खासकर स्वीमिंग में उसकी खाली जगह को कभी भरा नहीं जा सकता। डीपीएसजी में सीनियर स्पोर्ट्स कोच लेखीराम ने बताया कि नेशनल स्वीमिंग में ऊंचा मुकाम पाने वाली सायरा अच्छी खिलाड़ी के साथ उम्दा इंसान थी। उसकी दिनचर्या स्वीमिंग से शुरू और खत्म होती थी। क्लास टीचर आकाशदीप शर्मा ने बताया कि सौम्य स्वभाव की सायरा के सभी दोस्त थे। न उसे किसी से शिकायत थी, और न उससे किसी को। अपनी उपलब्धियों पर सायरा ने कभी घमंड नहीं किया।

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शनिवार को सायरा ने अंग्रेजी लैंग्वेज का पेपर दिया था। सोमवार को मनोविज्ञान का यूनिट टेस्ट था, जिसकी तैयारी कर रही थीं। सायरा चार बहनों में तीसरे नंबर की थी। दो बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है। छोटी बहन विभू इंग्राहम इंस्टीट्यूट में सातवीं में पढ़ती है। पिता जयदीप ने बताया कि रविवार को घर पर मेहमान आए थे। सायरा ने साथ रात साढे़ दस बजे खाना खाया था। सोमवार दोपहर पोस्टमार्टम के बाद रईसपुर श्मशान में अंतिम संस्कार कर दिया गया।

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सायरा की मौत के बाद दोस्तों ने फेसबुक पर प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दी हैं। वह भी चाहते हैं, कि वजह का खुलासा हो। एक दोस्त ने लिखा कि ‘सायरा तू ऐसे कैसे चली गई, बिना कुछ बताए।’ दूसरे ने लिखा ‘यार तू तो इतनी अच्छी थी एकदम स्ट्रांग, तो ये क्यों?’ तीसरे ने लिखा कि ‘यू विल बी मिस्ड।’ सायरा की मौत के बाद घर पर कोच राजू चौधरी से बात करतीं दोस्त।

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टीनएज में सुसाइड के तीन कारण हो सकते हैं। पहला मानसिक, दूसरा माहौल और तीसरा सामाजिक। जिसकी वजह से नवयुवा चुनौतियों का सामना नहीं कर पाते और उन्हें सुसाइड सबसे आसान समाधान जान पड़ता है। इन्हें पूरी तरह से रोका जा सकता है। अगर माता पिता या भाई बहन उनसे बात करें, जिनके साथ वे अपनी परेशानी बता सकें। - डॉ. शशांक शुक्ला, मनोचिकित्सक
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सायरा की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मां और बहन के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे। पिता की आंखें नम हैं। रिश्तेदार और आसपड़ोस के लोग भी गमजदा हैं। घर पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा है। सायरा के फेसबुक प्रोफाइल देखने पर पता चलता है कि उन्होंने 28 अक्तूबर को आखिरी बार फेसबुक को अपडेट किया था। उन्होंने 10 बजकर 26 मिनट पर एक फोटो अपलोड की हुई है, जिसमें वह एक हाथ में अवार्ड और बुके, दूसरे में माइक लिए हुए खड़ी हैं। इसी दिन 9 बजकर 14 मिनट पर भी सहेली के साथ सेल्फी डाली हुई है। एफबी पर वह टाई स्वीमिंग ग्रुप और देल्ही पब्लिक स्कूल गाजियाबाद से भी जुड़ी थीं। उनके फेसबुक पर जो भी फोटो हैं, सबमें वह मुस्कुराते हुए है। परिवारवाले, फ्रेंड्स और कोच सबका भी यही कहना है कि वह हंसमुख थी।
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