captain kapil kundu
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उन्होंने 'पागल दिवाना' नाम की कविता लिखी थी। उन्होंने इस कविता में देश के जवानों के बारे में जिक्र किया है और उनके मजबूत हौसले के बारे में लिखा है।
......'पागल दिवाना'.........
.......... अपने लहु से सिंचा है उन परवानों ने........यूंही नहीं ये वादियां जन्नत कहलाती हैं................
......... आज भी खड़ी है रूह-ए-अशिक इन सरहदों पे......आजमाना है किसी को अपना जोर तो आए........
........पूछा खुदा ने काफी कत्ल किए हैं उस जहान में........बोला,आशिक-ए-वतन हूं गुनाहों की हर सज़ा मंजूर है........
.......करके नम अपने चसम, बोले निज़ाम-ए-आलम.........ऐसे दलेर आशिक से पहली दफ़ा पाला पड़ा है.........
........बोला, खुदा कतार बहुत लंबी है अभी आने वालों की.......कमीं नहीं है मेरे मुल्क में उस पर मर मिटने वालों की.....