प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आते ही देश के सामने स्वच्छ भारत अभियान को मिशन के तौर पर प्रस्तुत किया। लेकिन उनके आवास से कुछ ही दूरी पर सफाई व्यवस्था को लेकर हालात चिंताजनक है।
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पीएम आवास के नजदीक इस तरह गंदगी के नर्क में उतरता है इंसान
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देशव्यापी सफाई अभियान को शुरू हुए एक साल बीत गया लेकिन इसका असर बेहद कम जगहों पर नजर आया। हालांकि पीएम ने इसकी आलोचना करने वालों को नसीहत दी है कि वे इससे दूर रहे।
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लेकिन सफाई के आंकलन से पता चलता है सफाई व्यवस्था के लिए सिस्टम अंदर से खोखला है। राजधानी के दूर-दराज के इलाकों की बात तो दूर संसद से महज पांच सौ मीटर की दूरी पर ही सीवर की सफाई बेहद कठिन काम है।
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सफाई कर्मी अपनी जान को जोखिम में ड़ालकर सीवर की सफाई करते हैं। इसके लिए नगर निगम या किसी भी तरह का सफाई अमला अबतक सीवर की सफाई के लिए कोई सुरक्षित विकल्प नहीं तलाश पाया है।
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इतना ही नहीं सफाई करने के लिए जरूरी सामान और तकनीकी उपकरण भी इन सफाई कर्मियों के पास नहीं है। ये सिर्फ फावडे से ही काम कर रहे हैं।
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दिल्ली सरकार और नगर निगम दोनों ही सफाई के मामले में अपनी अलग ही दलीलें और दावे पेश करते हैं।
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दिल्ली की जनता कुछ महीनों पहले दिल्ली में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान सियासी खींचतान देख ही चुकी है।
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हड़ताल के दौरान सफाई को मुददा बनाने और कर्मचारियों की लड़ाई लड़ने के दावे के साथ कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी आंदोलन में सफाईकर्मियों के साथ सड़क पर ही बैठ गए थे।
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सफाई को लेकर आंदोलन, अभियान और राजनीति करने से कोई भी राजनीतिक दल अबतक पीछे नहीं रहा है।
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लोगों की भीड़ और कैमरे के ऑन होते ही नेता कहीं भी सफाई में जुट जाएंगे लेकिन संसद जाते समय सफाई व्यवस्थाओं की बदहाली में पड़े इन सीवर पर उनका ध्यान शायद ही कभी जाएगा।