मैग्सेसे पुरस्कार मिलने के बाद संजीव चतुर्वेदी ने कहा कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान न खाऊंगा और न खाने दूंगा को असली जिंदगी में अमल करने की कोशिश में में लगे थे लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय से उन्हें निराशा ही मिली।
विज्ञापन
मैग्सेसे विजेता को मोदी ऑफिस से मिली थी निराशा, आखिर क्यों?
2 of 5
संजीव चतुर्वेदी ने कहा कि मैंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर भ्रष्टाचार मामलों की सीबीआई जांच की मांग उठाई थी लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
विज्ञापन
मैग्सेसे विजेता को मोदी ऑफिस से मिली थी निराशा, आखिर क्यों?
3 of 5
संजीव बोले कि यह अवार्ड बेशक मुझे मिला है, लेकिन मैं यह देश के तमाम ईमानदार अधिकारियों को समर्पित करना चाहता हूं, जो बिना भेदभाव और बिना डरे सच्चाई की आवाज बुलंद रखते हैं। चतुर्वेदी के मुताबिक, बतौर सीवीओ उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ काम किया, लेकिन सराहना की बजाय कार्रवाई करते हुए पद से हटा दिया गया।
मैग्सेसे विजेता को मोदी ऑफिस से मिली थी निराशा, आखिर क्यों?
4 of 5
पद से हटाने के लिए 24 घंटे में बीस हस्ताक्षर किए गए। जबकि पूरी फाइल छह महीने से सरकार के पास लटकी पड़ी है। अवार्ड की घोषणा से मुझे खुशी मिली है कि मेरे काम को तवज्जो मिली।
मैग्सेसे विजेता को मोदी ऑफिस से मिली थी निराशा, आखिर क्यों?
5 of 5
हालांकि मैं भारत सरकार की इजाजत मिलने के बाद ही इस अवार्ड को लेना चाहूंगा। अवार्ड के रूप में मिलने वाली धनराशि (करीब 30 हजार यूएस डालर- भारतीय मुद्रा में करीब 19 लाख रुपये) को एम्स के गरीब मरीज फंड में जमा करूंगा।